
शाजापुर। शाजापुर शहर में होटल हो या गार्डन हो, बिना वैध अनुमति के ही संचालित हो रहे हैं. कई होटल तो केवल दुकान और व्यवसायिक अनुमति पर ही संचालित हो रहे हैं. शाजापुर नगर पालिका ने आज तक किसी भी होटल या गार्डन पर कोई कार्यवाही नहीं की. दिल्ली की होटल में हुई घटना यदि शाजापुर में हो जाए, तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा. यही हाल गार्डनों का है. जिनमें बिना अनुमति के निर्माण किया जा रहा है.
गौरतलब है कि शाजापुर में दुपाड़ा रोड, एबी रोड पर लगभग आधा दर्जन होटल संचालित किए जा रहे हैं. होटल संचालन की वैध अनुमति नगर पालिका से नहीं ली गई है. नगर पालिका के रिकॉर्ड में शाजापुर का एक भी होटल, होटल के नाम से संचालित नहीं है और न ही किसी भी होटल को ट्रेड लाइसेंस नगर पालिका ने आज तक जारी किया है. यदि नगर पालिका के रिकॉर्ड की बात करें, तो नगर पालिका के रिकॉर्ड के अनुसार शाजापुर शहर में एक भी होटल वैधानिक अनुमति के साथ संचालित नहीं हो रहा है. कई होटल संचालकों ने तो व्यवसायिक दुकान के नाम पर नगर पालिका से अनुमति ली, जिस पर आलीशान होटल तान दिए गए. यही हाल गार्डनों का है. काशी नगर रोड पर जायसवाल गार्डन बिना अनुमति के ही खड़ा कर दिया गया है. जिसकी अनुमति नगर पालिका ने जारी नहीं की. इन होटल और गार्डनों में सुरक्षा के उचित उपाय भी नहीं है. यदि किसी दिन बड़ा हादसा हो गया, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा?
नोटिस के नाम पर होता है खेल, ठोस कार्यवाही आज तक नहीं हुई
जब भी अवैध निर्माण की शिकायत या मीडिया में खबरें आती हैं, तो जांच के नाम पर मोटी रकम लेकर मामले को दबा दिया जाता है. यही कारण है कि शाजापुर शहर में बिना अनुमति अवैध निर्माण धड़ल्ले से किए जा रहे हैं और पूर्व में भी किए गए हैं, लेकिन आज तक किसी भी अवैध निर्माण पर नगर पालिका का बुल्डोजर नहीं चल पाया. यदि एक-दो अवैध निर्माण पर नगरपालिका का बुल्डोजर चल जाए, तो अवैध निर्माण पर रोक लग सकती है. लेकिन पैसे के चक्कर में अनुमति जारी कर दी जाती है और बाद में जब घटना घटित होती है, तो एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर जिम्मेदार पल्ला झाड़ लेते हैं.
बिना अनुमति संचालित हो रहे आलीशान होटल
एबी रोड पर हाल ही में एक नया होटल शुरू हुआ है, जिसकी अनुमति व्यवसायिक है. उसके पास होटल चलाने का लाइसेंस नहीं है. उसी प्रकार पूर्व में एक नए होटल जिसका नाम परिवर्तन हो गया है, उसकी स्थिति यह है कि यदि होटल में कोई दुर्घटना हो जाए, तो निकलने के लिए एकमात्र रास्ता है. याने कि आपातकाल रास्ते की कोई व्यवस्था नहीं है. थाने के पास के होटल, दुपाड़ा रोड पर होटल, इनके पास नगर पालिका द्वारा होटल संचालन करने की किसी प्रकार की कोई अनुमति नहीं है. यही हाल गार्डनों का है. जायसवाल गार्डन ने तो सब को मात देते हुए इतना निर्माण कर लिया कि नगर पालिका ही बिल्डिंंग के आगे बोनी साबित हो गई.
फायर एनओसी तो ठीक नपा के पास होटल-गार्डन की जानकारी तक नहीं
लापरवाही की पराकाष्ठा पार हो गई कि शहर में एक दर्जन लक्जरी होटल संचालित हो रहे हैं और इतने ही गार्डन. जो हर महीने लाखों रुपए की कमाई करते हैं. डेढ़ से दो हजार रुपए और तीन हजार तक के रूम इन होटलों में किराये पर दिए जाते हैं. कई होटलों के नीचे तो दुकानें भी किराये से हैं. शादी के सीजन में गार्डनों में दो से तीन लाख तक की एक शादी की आय होती है. लेकिन किसी के पास भी न फायर एनओसी है, न ही आकस्मिक दुर्घटना घटित होने पर बचाव के लिए कोई पर्याप्त उपाय है. यहां तक कि इन होटलों-गार्डनों की वैध अनुमति नगरपालिका से आज तक नहीं ली गई.
ट्रेड लाइसेंस के बिना अवैध रूप से संचालित होटल-गार्डन…
ठ्ठ सुंदरम होटल
ठ्ठ राजश्री होटल
ठ्ठ शरणम होटल
ठ्ठ निलेश होटल
ठ्ठ जायसवाल गार्डन
ठ्ठ मल्हार गार्डन
ठ्ठ अमन गार्डन
ठ्ठ गौरी गार्डन
ठ्ठ पटेल गार्डन
ठ्ठ कमला सागर गार्डन
ठ्ठ दुर्गा गार्डन
ठ्ठ तोरण गार्डन
ठ्ठ राधा गार्डन
ठ्ठ शगुन गार्डन
ठ्ठ अपना गार्डन
इनका कहना है
शाजापुर शहर में किसी भी होटल का ट्रेड लाइसेंस नहीं है. न ही गार्डन की अनुमति किसी के पास है. शाजापुर नगर पालिका अवैध रूप से होटल-गार्डन संचालन को लेकर सख्त कार्यवाही करेगी. साथ ही इन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे. सभी होटल और गार्डनों की जांच के लिए दल बनाया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की घटना, दुर्घटना होने पर जिम्मेदार तय की जा सके.
– भूपेंद्र कुमार दीक्षित, सीएमओ-शाजापुर
