
सीधी ।शिवसैनिकों के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पुतला दहन कार्यक्रम को लेकर आज विथिका भवन परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। महज 20 से 25 शिवसैनिकों के विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए लगभग 200 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। शिवसेना कार्यकर्ता बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और जनसमस्याओं को लेकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारी पुतला लेकर कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने बीच रास्ते में ही पुतला छीन लिया और आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, इसके बावजूद पुलिस का रवैया बेहद सख्त दिखाई दिया।मौके पर चार थाना प्रभारी, दो एसडीओपी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट सहित भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा।
इतना ही नहीं, वाटर कैनन और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी तैनात की गईं। जिले में आमतौर पर बड़े आयोजनों में भी इतनी सुरक्षा व्यवस्था देखने को नहीं मिलती, लेकिन कुछ दर्जन प्रदर्शनकारियों के लिए प्रशासन ने पूरा अमला झोंक दिया। शिवसेना के प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया। उनका कहना है कि उन्हें कलेक्ट्रेट तक जाने का अधिकार नहीं दिया गया और विथिका भवन के आसपास के सभी रास्तों पर पुलिस का पहरा लगा दिया गया। प्रदर्शनकारियों को लगभग 20 मीटर के दायरे में सीमित कर दिया गया, जिससे उनका विरोध प्रदर्शन प्रभावी रूप से बाधित हो गया।लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन को नागरिकों का संवैधानिक अधिकार माना जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन से प्रशासन इतना भयभीत क्यों दिखाई दिया। जिले में अब यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या पुलिस का उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखना था या फिर विरोध की आवाज को कलेक्ट्रेट तक पहुंचने से रोकना।
