
भोपाल। मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह अभ्युदय मध्यप्रदेश के तीसरे और अंतिम दिन सोमवार की शाम सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का भव्य मंचन हुआ। यह प्रस्तुति राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली इतिहास को जीवंत कर गई। उज्जैन की संस्था विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति द्वारा प्रस्तुत इस महानाट्य का निर्देशन श्री संजीव मालवीय ने किया।
तीन अलग-अलग मंचों पर सजीव दृश्य प्रभावों, अत्याधुनिक ग्राफिक्स और भव्य सेट डिज़ाइन के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के न्यायप्रिय, प्रजावत्सल और पराक्रमी व्यक्तित्व को साकार किया गया। मंच पर महाकाल मंदिर का प्रतिरूप, आश्रम, वन दृश्य, ऊंट-घोड़े-पालकियों का प्रयोग और 150 कलाकारों की सशक्त प्रस्तुति ने दर्शकों को विक्रमादित्य के युग में पहुंचा दिया।
नाटक में सम्राट विक्रमादित्य की विद्या, नीति, शौर्य और दानशीलता के साथ बेताल पच्चीसी और सिंहासन बत्तीसी की कथाओं को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों के संवाद और नृत्य दृश्यों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। दर्शकों की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया को देखते हुए इस महानाट्य का पुनः मंचन किया गया।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी सहित कई मंत्रीगण और अतिथि उपस्थित रहे।
समापन सत्र में सुप्रसिद्ध गायिका स्नेहा शंकर ने सुगम संगीत की सुरम्य प्रस्तुति दी, जिसमें उनके मधुर स्वरों और भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने पूरे वातावरण को संगीत के जादू से भर दिया।
तीन दिवसीय इस आयोजन में लोकनृत्य, ड्रोन शो और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मध्यप्रदेश की विरासत से विकास तक की यात्रा को उजागर किया गया और सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य इस सांस्कृतिक उत्सव का स्वर्णिम शिखर साबित हुआ।
