गौवीनाथ मंदिर की व्यवस्थाएं कटघरे में, इलाज के इंतजार में चली गई श्रद्धालु की जान

सतना:अधिमास के चलते बिरसिंहपुर स्थित गौवीनाथ मंदिर में इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर प्रशासन द्वारा व्यापक इंतजाम किए जाने के दावे भी किए जा रहे हैं, लेकिन दो दिन पूर्व मंदिर परिसर में हुई एक घटना ने इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. दर्शन के लिए पहुंचे एक सेवानिवृत्त मंडी निरीक्षक की तबीयत बिगड़ने के बाद समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल सकी और उनकी मौत हो गई. घटना के बाद अब स्वास्थ्य और आपातकालीन व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

जानकारी के अनुसार, अधिमास के चलते मंदिर में सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. भीड़ को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों द्वारा आवश्यक व्यवस्थाएं किए जाने की बात कही जा रही है. लेकिन दो दिन पूर्व दर्शन के लिए पहुंचे एक सेवानिवृत्त मंडी निरीक्षक की अचानक तबीयत बिगड़ गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता थी, लेकिन मौके पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं मिला प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि घटना की सूचना मिलने के बाद एम्बुलेंस को मंदिर परिसर तक पहुंचने में करीब 25 से 30 मिनट का समय लग गया. इस दौरान श्रद्धालु की हालत लगातार बिगड़ती रही. लोगों का कहना है कि यदि मौके पर प्राथमिक उपचार की व्यवस्था उपलब्ध होती या तत्काल चिकित्सकीय सहायता मिल जाती, तो स्थिति कुछ और हो सकती थी.

हालांकि इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जांच की बात कही जा रही है. हालांकि व्यवस्थाओं के दावों और हकीकत के बीच घटना के बाद एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब अधिमास को देखते हुए स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्थाओं के व्यापक दावे किए जा रहे थे, तब आपात स्थिति में तत्काल सहायता क्यों नहीं मिल सकी. प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा लगातार व्यवस्थाओं का निरीक्षण किए जाने तथा विभिन्न गतिविधियों की तस्वीरें भी साझा की जा रही हैं. ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सभी व्यवस्थाएं सक्रिय थीं, तो जरूरत के समय उनका लाभ श्रद्धालु को क्यों नहीं मिल पाया

सूत्रों के मुताबिक घटना के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन अब तक किसी स्तर पर स्पष्ट जिम्मेदारी तय नहीं की गई है.

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