सतना: कृषि उपज मंडी ने इस वित्तीय वर्ष में अपनी आय में 4 करोड़ रुपए की वृद्धि दर्ज की है। धान और गेहूं की भारी सरकारी खरीदी के बावजूद, मंडी में अन्य जिंसों और मोटे अनाजों की आवक बढ़ने से यह सफलता हाथ लगी है। बेहतर प्रबंधन और किसानों को मिलने वाले उचित दामों ने सतना मंडी को विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
सतना।विंध्य क्षेत्र की प्रमुख मंडियों में शुमार सतना कृषि उपज मंडी के लिए यह साल बड़ी उपलब्धियों वाला रहा है। मंडी प्रशासन ने इस वर्ष अपने राजस्व में 4 करोड़ रुपए की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। यह सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि जिले में धान और गेहूं की मुख्य फसल होने के कारण इनका एक बड़ा हिस्सा सीधे सरकारी केंद्रों पर खरीदा जाता है। इसके बावजूद मंडी की आय में यह उछाल प्रशासनिक सक्रियता और व्यापारिक विविधता का परिणाम माना जा रहा है।
सतना जिला मुख्य रूप से गेहूं और धान की खेती के लिए जाना जाता है, लेकिन मंडी की आय बढ़ाने में अन्य फसलों की अहम भूमिका रही है। मंडी में इस साल चना, अरहर, तिल और सरसों जैसी फसलों की भारी आवक देखी गई। इसके अलावा, क्षेत्र के किसानों का रुझान मोटे अनाजों की ओर भी बढ़ा है, जिसके चलते मंडी में ज्वार और मक्का की अच्छी बिक्री हुई है।
किसानों को यहां अपनी उपज का सही और अच्छा दाम मिल रहा है। अन्य अनाजों की पैदावार और उनकी बाजार मांग में हुई ग्रोथ ने मंडी के खजाने को भरने में मदद की है। व्यापारियों और किसानों के बीच बढ़ते सामंजस्य और मंडी की बेहतर सुविधाओं के कारण अब किसान दूर-दराज के क्षेत्रों से भी अपनी फसल लेकर सतना पहुंच रहे हैं।
सरकारी खरीदी का दबाव होने के बावजूद 4 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त करना यह दर्शाता है कि सतना मंडी अब केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं है।
मंडी सचिव ने करुणेश तिवारी ने बताया कि मंडी की पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 40 प्रतिशत यानि 4 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई है। एक साल की मंडी आय 10 करोड़ के आसपास होती है।
