छतरपुर। मानवीय संवेदनाओं, संघर्ष और उम्मीदों के बीच झूलते एक अनाथ बचपन की दास्तां जब मंच पर उतरी, तो दर्शकों की आँखें नम हो गईं और तालियों की गूँज ने आकाश थाम लिया। शंखनाद नाट्य मंच के तत्वावधान में आयोजित एकल नाटक ‘सूरज’ के माध्यम से छतरपुर के स्कूली बच्चों को रंगमंच की गहराई और जीवन के उल्लास से परिचित कराया गया।
बिना तामझाम, केवल अभिनय का जादू
कोलकाता से आए कुशल अभिनेता फुलेंद्र पंडित ने जम्मू के ख्यातिलब्ध निर्देशक लकी जी गुप्ता के निर्देशन में तैयार इस एक घंटे की एकल नाट्य प्रस्तुति से समां बांध दिया। बिना किसी माइक, लाइट इफेक्ट या भव्य स्टेज के, फुलेंद्र ने अपनी संवाद अदायगी और शारीरिक अभिनय से कई पात्रों को जीवंत किया। उन्होंने संदेश दिया कि दुनिया का अंधकार चाहे कितना भी गहरा हो, इंसान अपने जज़्बे से ‘सूरज’ बनकर चमक सकता है।
संघर्ष से सफलता तक की ‘सूरज’ की कहानी
नाटक की कहानी ‘सूरज’ नाम के एक अनाथ बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है, जो फुटपाथ पर प्लास्टिक बीनकर अपना पेट पालता है। किस्मत के थपेड़े उसे एक गैंग के चंगुल में फंसा देते हैं, जहाँ वह पाँच साल तक बंधुआ बाल मजदूर बनकर नारकीय जीवन जीता है। वहां से भागकर एक अनजान शहर पहुँचे सूरज को एक नेक इंसान का सहारा मिलता है, जो उसे न केवल शिक्षित करता है बल्कि उसके थिएटर के शौक को भी पंख देता है। अंततः सूरज अपनी मेहनत से सफलता के शिखर को छूता है।
इन विद्यालयों में गूँजी प्रेरणा की आवाज़
बच्चों को रंगमंच से जोड़ने के इस अभियान के तहत जिले के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में मंचन किया गया
तक्षशिला स्कूल में लगभग 500 बच्चों के बीच हुई अंतिम प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया। इस अवसर पर आर्टिस्ट योगेंद्र योगी, शिवेन्द्र शुक्ला, सर्वेश खरे सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
