इंदौर: पुलिस अब पुराने तरीके छोड़कर पूरी तरह डिजिटल जांच की ओर बढ़ रही है. विवेचना अधिकारियों को दिए गए टैबलेट से अब मौके पर ही सबूत जुटाए जाएंगे और केस की पूरी कार्रवाई ऑनलाइन दर्ज होगी.दरअसल, अब तक पुलिस को किसी भी केस में सबूत जुटाने के लिए फोटो, वीडियो, दस्तावेज अलग-अलग तरीके से इकट्ठा कर बाद में फाइल में जोड़ना पड़ता था. इसमें समय भी लगता था और कई बार सबूत सुरक्षित रखना भी चुनौती होता था. अब टैबलेट के जरिए मौके पर ही फोटो, वीडियो, लोकेशन और अन्य डिजिटल सबूत सीधे सिस्टम में अपलोड किए जाएंगे.
इसे ही आसान भाषा में साक्ष्य संकलन कहा जा रहा है. वहीं ई-विवेचना का मतलब है कि पूरे केस की जांच प्रक्रिया अब ऑनलाइन होगी. यानी केस डायरी लिखने से लेकर गवाहों के बयान, सबूतों का रिकॉर्ड और कार्रवाई की पूरी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की जाएगी. इससे कागजी काम कम होगा और जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी. पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने बताया कि अब जांच अधिकारी मौके से ही जानकारी अपडेट कर सकेंगे. इससे केस में देरी कम होगी और हर कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा, जिसे बाद में आसानी से जांचा जा सकेगा. इस सिस्टम से न सिर्फ जांच तेज होगी, बल्कि सबूत मजबूत होंगे और कोर्ट में केस भी ज्यादा प्रभावी तरीके से पेश किए जा सकेंगे.
फायदे और चुनौतियां…
नई व्यवस्था लागू होने के बाद पुलिस को मौके पर ही फोटो, वीडियो और लोकेशन के साथ पुख्ता सबूत जुटाने में आसानी होगी, जिससे जांच की गति बढ़ेगी और केस डायरी तुरंत अपडेट हो सकेगी. डिजिटल साक्ष्य होने से सबूतों के गुम होने या छेड़छाड़ की आशंका भी कम होगी और वरिष्ठ अधिकारी कभी भी ऑनलाइन जांच की निगरानी कर सकेंगे. इससे कोर्ट में भी मजबूत तरीके से साक्ष्य पेश करना आसान होगा. हालांकि इसके साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आएंगी. नेटवर्क या तकनीकी दिक्कत आने पर काम प्रभावित हो सकता है. साथ ही सभी पुलिसकर्मियों को तकनीक में दक्ष बनाना जरूरी होगा. डिजिटल डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखना भी बड़ी जिम्मेदारी रहेगी. इसके अलावा टैबलेट के रखरखाव और सही उपयोग पर ही इस व्यवस्था की सफलता निर्भर करेगी
