25-28 वर्ष सेवा के बाद शिक्षकों की परीक्षा लेना अनुचित: कर्मचारी संघ

जबलपुर: मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग में करीब 65 हजार शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य कर दी गई है। विभाग में कुल 95 हजार शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें से अधिकांश को दो वर्षों के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष अटल उपाध्याय ने कहा कि 25 से 28 वर्ष सेवा के बाद शिक्षकों की योग्यता जांचना उचित नहीं है। प्रदेश प्रवक्ता अनिल भार्गव (वायु) ने बताया कि यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुपालन में लिया गया है।

संघ के प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह ने ए.एन.एम. वर्ष 2023 परीक्षा के अपात्र घोषित अभ्यर्थियों के पुनः परीक्षण पर भी विरोध जताया। जिला अध्यक्षों अरुण चतुर्वेदी, योगेन्द्र मिश्रा, अरुण पटेल, राजू मस्के, सुभाष गौतम, परशुराम तिवारी, बृजेश मिश्रा, के जी पाठक, हेमंत पाठक, दाल चंद पासी, राम शंकर शुक्ला, गगन चौबे, राकेश उपाध्याय, विनय नामदेव, सतीश उपाध्याय ने शासन से अपील की कि सेवा के 25-28 वर्ष पश्चात शिक्षकों की योग्यता जांचने जैसे आदेश न जारी किए जाएं।

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