भोपाल। राजधानी भोपाल में सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने पटाखों की दुकानों और गोदामों को घनी आबादी वाले इलाकों से बाहर शिफ्ट करने की कवायद शुरू कर दी है. इसके तहत जिले की अधिकांश पटाखा दुकानों की जांच पूरी कर ली गई है और अब इन्हें रिहायशी क्षेत्रों से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने के लिए जमीन तलाशने की तैयारी चल रही है. गौरतलब है कि करीब 30 साल पहले पुराने शहर में बढ़ती बसाहट को देखते हुए इन दुकानों और गोदामों को हलालपुर शिफ्ट किया गया था, लेकिन बीते तीन दशकों में यह इलाका भी एक बार फिर भारी आबादी से घिर चुका है. चिंता की बात यह है कि इन पटाखा गोदामों के आस-पास वर्तमान में गैस गोदाम और पेट्रोल पंप भी संचालित हो रहे हैं, जिससे यहाँ हमेशा किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है. भविष्य में किसी भी संभावित विस्फोटक दुर्घटना को रोकने के लिए प्रशासन अब यह कदम उठाने जा रहा है.
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में जो दुकानें और गोदाम सबसे ज्यादा आबादी वाले क्षेत्रों से घिरे हैं, वे मुख्य रूप से बैरागढ़ और कोलार क्षेत्र में स्थित हैं. सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन का पूरा ध्यान इन्हीं क्षेत्रों की दुकानों को शिफ्ट करने पर है, जबकि हुजूर और बैरसिया क्षेत्र की दुकानें ग्रामीण इलाकों में होने के कारण वहाँ आबादी की कोई बड़ी समस्या नहीं है.
अगर आंकड़ों की बात करें तो वर्तमान में बैरागढ़ वृत्त में 15 दुकानें और 5 पटाखा गोदाम संचालित हो रहे हैं, वहीं कोलार तहसील में 1 दुकान और 1 गोदाम आबादी के बीच है. इसके विपरीत, हुजूर तहसील के जमुनिया क्षेत्र में 12 गोदाम और बैरसिया तहसील में 8 दुकानें (जिनमें से एक वर्तमान में बंद है) स्थित हैं. ग्रामीण अंचल में होने के कारण हुजूर और बैरसिया की दुकानों पर फिलहाल कोई खतरा नहीं है, इसलिए प्रशासन का मुख्य फोकस बैरागढ़ और कोलार के संवेदनशील रिहायशी इलाकों को इस खतरे से मुक्त कराना है.
