15 हेक्टेयर जमीन पर काल भैरव मंदिर का काया कल्प

उज्जैन: सिंहस्थ से पहले उज्जैन में अब राजाधिराज महाकाल के सेनापति बाबा कालभैरव के दरबार का भी भव्य कायाकल्प होने जा रहा है. जिला प्रशासन ने मंदिर क्षेत्र के विस्तार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर बड़ी तैयारी शुरू कर दी है. करीब 200 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना पर मंथन चल रहा है.

भैरवगढ़ क्षेत्र में स्थित यह प्राचीन मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है. चुनाव में सफलता, बड़े पद की प्राप्ति, व्यापार में उन्नति और घर में सुख-शांति की कामना लेकर देशभर से भक्त यहां पहुंचते हैं. बाबा कालभैरव को मदिरा का भोग लगाने की अनूठी परंपरा विश्वभर में प्रसिद्ध है. यही कारण है कि प्रतिदिन यहां हजारों श्रद्धालु आते हैं और पर्व-त्योहारों में यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है.

काल भैरव लोक की छटा
अब जब सिंहस्थ 2028 में करीब 50 करोड़ श्रद्धालुओं के उज्जैन आने का अनुमान है, तब प्रशासन ने कालभैरव क्षेत्र को भी महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी तेज कर दी है. मंदिर परिसर में मल्टी लेवल पार्किंग, विशाल सुविधा केंद्र, हरित उद्यान, फाउंटेन, आकर्षक मूर्तियां, प्रतीक्षा क्षेत्र और श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था विकसित की जाएगी. भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए जनरल, वीआईपी और विशेष प्रवेश के लिए अलग-अलग द्वार बनाए जाएंगे.

15 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण
कालभैरव मंदिर तक पहुंचने वाला वर्तमान संकरा मार्ग अब फोरलेन बनाने की तैयारी में है. पूरे मंदिर का नवनिर्माण करने के मद्देनजर करीब 15 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई जा रही है. कुछ सरकारी जमीन खाली पड़ी है, जिसे परियोजना में शामिल किया जाएगा, वहीं कई निजी जमीनें भी अधिग्रहण की जद में आ रही हैं. बताया जा रहा है कि प्रभावशाली और रसूखदार लोगों की जमीनें भी इस दायरे में हैं, जिसके चलते क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है. प्रशासनिक स्तर पर लगातार मंथन और दबाव की स्थिति बनी हुई है.

प्राधिकरण निर्माण एजेंसी
उज्जैन विकास प्राधिकरण निर्माण एजेंसी के रूप में कार्य करेगा, जबकि जिला प्रशासन निजी और सरकारी जमीन के समन्वय पर काम कर रहा है. नई अप्रोच रोड और पार्किंग व्यवस्था से श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी तथा सिंहस्थ के दौरान यातायात व्यवस्था अधिक सुगम हो सकेगी.

अतिक्रमण हटेगा
मंदिर परिसर के आसपास फैले अवैध ठेले और अस्थायी दुकानों को हटाने की भी तैयारी है. दर्शनार्थियों के बैठने के लिए कुर्सियां लगाई जाएंगी. धर्मशालाओं का रंगरोगन होगा और पूरे परिसर को स्वच्छ व सौंदर्ययुक्त बनाया जाएगा. कालभैरव मंदिर के पीछे बने पार्क को कलात्मक रूप देने की योजना है. सूखे पेड़ों को काटने के बजाय उन पर पेंटिंग कर आकर्षक कलाकृतियों में बदला जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को आध्यात्मिकता के साथ सौंदर्य का भी अनुभव हो सके.

500 रुपए का विशेष शुल्क
विशेष बात यह भी है कि मंदिर में श्रद्धालुओं से लिए जा रहे 500 रुपये शुल्क से अब तक लगभग 15 लाख रुपये की राशि एकत्र हो चुकी है. माना जा रहा है कि बाबा कालभैरव का यह भव्य धाम केवल सरकारी धन से नहीं, बल्कि भक्तों की आस्था और मंदिर की अपनी आय से भी आकार लेगा.

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