नयी दिल्ली 05 मई (वार्ता) सरकार ने देश में समुद्री जहाज मरम्मत इकोसिस्टम बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए 1570 करोड़ रुपये की लागत से गुजरात के वाडीनार में एक अत्याधुनिक जहाज मरम्मत सुविधा के विकास को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को यहां हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी।
सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि यह सुविधा गुजरात के वाडीनार में विकसित की जायेगी। यह राष्ट्रीय जहाज मरम्मत पारिस्थितिकी तंत्र के बड़े विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस परियोजना को दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से 1,570 करोड़ रुपये के निवेश से लागू किया जाएगा। यह परियोजना एक ब्राउनफील्ड सुविधा के रूप में विकसित की जाएगी, जिसमें 650 मीटर लंबी जेट्टी, दो बड़े फ्लोटिंग ड्राई डॉक, कार्यशालाएं तथा संबंधित समुद्री अवसंरचना शामिल होंगी। वाडीनार का प्राकृतिक गहरा ड्राफ्ट, प्रमुख समुद्री मार्गों से जुड़ाव तथा मुंद्रा और कांडला जैसे प्रमुख बंदरगाहों के निकट होने के कारण यह बड़े वाणिज्यिक और विदेशी ध्वज वाले जहाजों की मरम्मत के लिए एक उपयुक्त स्थान है।
यह परियोजना कौशल विकास के अवसर भी पैदा करेगी और प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करेगी, साथ ही आसपास के क्षेत्र में समुद्री सहायक सेवाओं और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के विकास को बढ़ावा देगी।
वाडीनार जहाज मरम्मत सुविधा भारत के जहाज मरम्मत अवसंरचना में एक महत्वपूर्ण कमी को सीधे पूरा करेगी, क्योंकि अभी देश में 230 मीटर से अधिक लंबाई वाले बड़े जहाजों की मरम्मत के लिए पर्याप्त घरेलू क्षमता नहीं है। यह सुविधा 300 मीटर तक के जहाजों की मरम्मत कर उच्च मूल्य वाले बड़े जहाजों की मरम्मत देश में ही संभव बनाएगी। इससे विदेशी शिपयार्ड पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा के बाहर जाने में कमी आएगी।
यह पहल क्षेत्रीय आर्थिक विकास में योगदान देगी और समुद्री भारत दृष्टि 2030 तथा समुद्री अमृत काल दृष्टि 2047 के तहत भारत के दीर्घकालिक समुद्री लक्ष्यों को हासिल करने में सहयोग करेगी।
