मालवा- निमाड़ की डायरी संजय व्यास। नीमच नगर पालिका नेता प्रतिपक्ष योगेश प्रजापति को नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ दायर याचिका में मुंह की खानी पड़ी है. मामला अध्यक्ष पद के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर था. याचिका में कहा गया था कि अध्यक्ष द्वारा बिना वैध गजट नोटिफिकेशन के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों का उपयोग किया जा रहा है, जो मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 के प्रावधानों के विरुद्ध है. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के जस्टिस प्रणय वर्मा ने अत्याधिक देरी से न्यायालय में मामला लाने पर याचिका खारीज तो की ही साथ ही प्रजापति को आईना भी दिखा दिया कि इतना समय गुजर जाने के बाद उनकी आंख खुली. दरअसल नीमच नगर पालिका अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. जस्टिस प्रणय वर्मा ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा याचिकाएं करीब 4 साल की देरी से दायर की गईं. याचिकाकर्ता अपने अधिकारों को लेकर निष्क्रिय रहे. इतनी देरी के बाद राहत नहीं दी जा सकती.

कोर्ट ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि जो लोग वर्षों तक अपने अधिकारों को लेकर सोए रहे, वे संवैधानिक राहत के हकदार नहीं हैं. साथ ही यह भी कहा गया कि अगर अब हस्तक्षेप किया गया, तो पिछले 4 साल में लिए गए वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों पर असर पड़ेगा और प्रशासनिक अव्यवस्था पैदा होगी. कोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में कहा गजट नोटिफिकेशन का मुद्दा पहले से न्यायालयों में उठ चुका है. कुछ मामलों में समय पर याचिका आने पर कार्रवाई भी हुई लेकिन देरी से दायर याचिकाओं को स्वीकार नहीं किया जा सकता. उल्लेखनीय है कि नगर पालिका के कार्यकाल के कुछ ही माह शेष हैं. 2027 में फिर चुनाव होंगे.
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में बेकाबू व्यवस्था मालवा और निमाड़ में दो ज्योतिर्लिंग विशेष मायने रखते हैं. उज्जैन के महाकाल की व्यवस्थाएं तो उच्च श्रेणी की हैं, लेकिन ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के साथ सौतेलापन क्यों? यहां प्रदेश स्तर के प्रशासन द्वारा हैंडल क्यों नहीं किया जाता? खंडवा का जिला प्रशासन पूरी तरह व्यवस्थाओं के मामले में फेल हो गया है. वह आम लोगों को व्यवस्थित दर्शन भी नहीं करा पा रहा है. करोड़ों रुपए श्रद्धालुओं के द्वारा भेंट भी किए जाते हैं, सरकार भी देती है इसके बावजूद पैसा मनी ऑर्डर तथा ऑनलाइन पेमेंट का , कहां जा रहा है? नगर पालिका पर सीधे तौर पर लूट के आरोप लग रहे हैं. गंदगी भी साफ नहीं होती. प्रशासन ने आईएएस अफसरों को भी लगाया, पर वे ढंग से काम नहीं कर पाए. 20 प्रतिशत लोग मुख्य दिनों में बिना दर्शन वापस लौट रहे हैं. आस्था के नाम पर चलने वाले छोटी सी व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं .

श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं या लाठियां खाने? ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में अव्यवस्था का आलम यह है कि जब-तब श्रद्धालुओं से प्रबंधन में लगे कर्मचारियों की मारपीट की घटनाएं सामने आती रहती हैं. ओंकारेश्वर मंदिर के कर्मचारी की खीझ साफ दिखती है कि हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले श्रद्धालुओं से कैसा बर्ताव किया जा रहा है? ऐसी अप्रिय, कलंकदायी घटनाओं पर न कोई कार्रवाई और न ही सुधार होता है. यह बातें प्रबंधन की छवि ही बिगाड़ रही है व नाम खराब होता है ओंकारेश्वर का. इसमें जिले का प्रशासन पूरी तरह असफल दिखाई देता है. ओंकारेश्वर में रविवार को फिर मारपीट हुई. यहां तैनात कर्मचारियों ने लाठियां से भी दर्शन करने आए लोगों को पीटा. सवाल यह उठता है कि दूर-दूर से श्रद्धालु यहां भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन करने आते हैं या लाठियां खाने? प्रदेश की सरकार को सिंहस्थ 2028 से पहले ओंकारेश्वर की ‘बिगड़ैल’ व्यवस्थाओं पर अंकुश लगाना होगा.
