सीहोर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों भीषण गर्मी के बीच गहराए बिजली संकट ने लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. 44 डिग्री से अधिक तापमान और उमस भरी रातों में लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती से ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है. दिन हो या रात, बार-बार बिजली की आवाजाही और घंटों तक सप्लाई बंद रहने से लोग परेशान हैं. कहीं जनप्रतिनिधियों को विद्युत अधिकारियों के साथ बैठक करनी पड़ी तो कहीं ग्रामीणों ने सब स्टेशन का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया.
श्यामपुर क्षेत्र के दोराहा में मंडल अध्यक्ष एवं पदाधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधियों ने विद्युत वितरण केंद्र पहुंचकर अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार हो रही बिजली कटौती और विद्युत व्यवस्थाओं को लेकर आठ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई. अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि दोराहा तहसील क्षेत्र में लोड शेडिंग बंद करने का प्रयास किया जाएगा तथा अन्य क्षेत्रों में कटौती वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा के बाद ही की जाएगी.
बैठक में यह भी तय हुआ कि मेंटेनेंस कार्य में तेजी लाने के लिए वर्तमान से चार गुना अधिक लेबर लगाई जाएगी, ताकि समय सीमा में कार्य पूर्ण हो सके. किसानों की समस्याओं को लेकर भी चर्चा हुई, जिसमें कहा गया कि जिन किसानों के मशीनी उपकरण साल में केवल एक बार उपयोग में आते हैं, उन्हें ओवरलोड की श्रेणी में न रखा जाए. वहीं ऐसे मामलों को निरस्त करने पर भी सहमति बनी जहां डीपी, खंभे, तार या पंप-कुएं मौजूद ही नहीं हैं. विद्युत कंपनी के अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की कि किसी भी कर्मचारी को बिना रसीद राशि न दें. यदि कोई कर्मचारी पैसा लेकर रसीद नहीं देता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएग. स्मार्ट मीटरों से अधिक बिल आने की शिकायतों पर भी जांच कर मीटर बदलने की बात कही गई. जर्जर पोल और झूलते तारों को जल्द बदलने तथा जरूरत के अनुसार कनेक्शन लोड कम करने का आश्वासन भी अधिकारियों ने दिया.
इधर बरखेड़ी विद्युत मंडल सब स्टेशन पर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा. ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए सब स्टेशन का घेराव किया और विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शन में चंदेरी, पिपलिया मीरा, बरखेड़ी, आलमपुरा, बिजलोन, बडनग़र, हीरापुर, रामखेड़ी, टिटोड़ा और भैंसाखेड़ी सहित कई गांवों के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए. ग्रामीणों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से रात में दो से तीन बार बिजली काटी जा रही है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का हाल बेहाल है. उमस और मच्छरों के कारण लोग रातभर जागने को मजबूर हैं. पेयजल संकट भी लगातार गहराता जा रहा है क्योंकि बिजली बंद होने से मोटर और नल-जल योजनाएं प्रभावित हो रही हैं.
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शहरों में बिजली कटौती नहीं की जा रही, जबकि गांवों को अंधेरे में रखा जा रहा है. ग्रामीणों ने मांग की कि यदि बिजली संकट है तो बड़े औद्योगिक क्षेत्रों और फैक्ट्रियों में कटौती की जाए, लेकिन गांवों की बिजली आपूर्ति बाधित न हो.
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रिकालीन बिजली आपूर्ति तत्काल सुचारु कराई जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा.
गांव ही नहीं नगरीय क्षेत्र भी कटौती से परेशान
बिजली के अभाव में भीषण गर्मी और झुलसा देने वाली धूप का सामना करने वालों में केवल ग्रामीण क्षेत्र ही नहीं नगरीय क्षेत्र के रहवासी भी खासे त्रस्त हैं. शहर में मेंटेनेंस के नाम पर जहां रोजाना घोषित कटौती की जा रही है तो कई घंटों की कटौती अघोषित रूप से भी किए जाने से लोगों में आक्रोश का माहौल बना हुआ है. मंडी, चाणक्यपुरी, भोपाल नाका, इंग्लिशपुरा, इंद्रानगर कालोनी सहित अधिकांश क्षेत्रों में दिन भर बिजली की आवाजाही ने लोगों को परेशान कर रखा है.
