सीहोर। स्वास्थ्य विभाग और शासकीय नियुक्तियों में फर्जीवाड़े को लेकर जिले से चौंकाने वाला मामला सामने आया है. बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ रेडियोग्राफर हीरा सिंह कौशल ही प्रदेशभर में फर्जी डिग्रियां बनाने और बेचने वाले रैकेट का मुख्य सरगना निकला है. मामला उजागर होने के बाद आरोपी रेडियोग्राफर को बर्खास्त कर दिया गया है.
दमोह पुलिस ने भोपाल से गिरफ्तार किए गए इस मुख्य आरोपी हीरा सिंह कौशल को कोर्ट में पेश कर 5 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया है. आरोपी हीरा सिंह कौशल बिलकिसगंज में बतौर रेडियोग्राफर सेवाएं दे रहा था. नौकरी की आड़ में वह लंबे समय से प्रदेश में फर्जी मेडिकल डिग्रियों का काला कारोबार चला रहा था. जांच में सामने आया है कि उसने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संजीवनी क्लीनिक में फर्जी डिग्रियों के आधार पर कई लोगों को डॉक्टर बनवाकर नौकरी पर लगवाया. पुलिस की शुरुआती पूछताछ में अब तक 12 से ज्यादा फर्जी डॉक्टरों के नाम सामने आ चुके हैं, जिन्होंने हीरा सिंह से डिग्रियां खरीदी थीं. आरोपी के खिलाफ अब तक दो एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं. गौरतलब है कि जबलपुर के संजीवनी क्लीनिक में पदस्थ अजय मौर्य नामक व्यक्ति की फर्जी डिग्री की जांच कराई थी. जांच में मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार के पास आरोपी का कोई रिकॉर्ड या रजिस्ट्रेशन नहीं मिला. अजय मौर्य के साथ-साथ कुमार सचिन यादव और राजपाल गौर की डिग्रियां और रजिस्ट्रेशन भी पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं. जबलपुर से गिरफ्तार अजय मौर्य की रिमांड अवधि भी 23 मई तक बढ़ा दी गई है.
