फर्जी दस्तावेजों से मिली नौकरी आखिरकार गई, 6 साल बाद शिक्षक सेवा से बाहर

खंडवा। फर्जी दस्तावेजों के सहारे शासकीय नौकरी हासिल करने वाले प्राथमिक शिक्षक मोहन सिंह काजले पर आखिरकार प्रशासन का शिकंजा कस गया। लंबे समय से चल रहे मामले में न्यायालय से दोषी करार दिए जाने के बाद कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने उन्हें शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है।

मोहन सिंह काजले खालवा विकासखंड की शासकीय प्राथमिक शाला रायपुरढाना में पदस्थ थे। वर्ष 2020 में फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी पाने के आरोप सामने आने पर उन्हें निलंबित किया गया था। जांच के दौरान मामला इतना गंभीर पाया गया कि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार भी किया।

खंडवा के द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ने 25 अप्रैल 2026 को सुनाए फैसले में शिक्षक को धोखाधड़ी, जालसाजी और साक्ष्य छिपाने सहित विभिन्न धाराओं में दोषी माना। अदालत ने आरोपी को तीन वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।

न्यायालय के फैसले के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि फर्जीवाड़ा कर नौकरी हासिल करने वालों के लिए शासकीय सेवा में कोई जगह नहीं है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि आरोपी का कृत्य गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है, इसलिए तत्काल प्रभाव से सेवा समाप्त की जाती है।

प्रशासन ने निलंबन अवधि के दौरान दिए जा रहे जीवन निर्वाह भत्ते को भी 24 अप्रैल 2026 से बंद करने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और अब अन्य संदिग्ध नियुक्तियों की भी जांच तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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