इंदौर: हनीट्रैप मामले में गिरफ्तार भाजपा नेत्री रेशु चौधरी के प्रभावशाली नेताओं से कनेक्शन और कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क में भूमिका सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने मामले के राजनीतिक और अन्य लिंक की पड़ताल तेज कर दी है.मामले की जांच में अब राजनीतिक कनेक्शन भी खुलकर सामने आने लगे हैं. शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर को ब्लैकमेल करने के मामले में गिरफ्तार रेशु चौधरी की पहचान एक महत्वाकांक्षी राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में सामने आई है.
पुलिस इस मामले में अलका दीक्षित, श्वेता विजय जैन, रेशु चौधरी, जितेंद्र पुरोहित, लाखन चौधरी और जयदीप दीक्षित को गिरफ्तार कर चुकी है. सूत्र बताते हैं कि श्वेता जैन इस नेटवर्क की मास्टरमाइंड थी, जबकि रेशु को सामने रखकर हाई-प्रोफाइल संपर्क साधे जा रहे थे. विश्वसनीय जानकारी के मुताबिक रेशु की जोबट के एक प्रभावशाली नेता से करीबी थी. वह कई राजनीतिक कार्यक्रमों में सक्रिय रही और सोशल मीडिया पर भी उसकी मौजूदगी बढ़ती जा रही थी. बताया जा रहा है कि रेशु भविष्य में महिला आयोग अध्यक्ष जैसे पद तक पहुंचने की इच्छा रखती थी.
इसी वजह से वह बड़े नेताओं और अधिकारियों के संपर्क में रहने की कोशिश कर रही थी. रेशु का संबंध सागर के मकरोनिया क्षेत्र से बताया है. सामान्य परिवार से आने वाली रेशु के पति की करीब तीन साल पहले मौत हो चुकी है. इसके बाद उसने राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में खुद को पूरी तरह सक्रिय कर लिया था. सूत्रों के अनुसार पिछले चुनावों में उसने कई नेताओं के लिए प्रचार किया और धीरे धीरे अपनी पहचान मजबूत करने लगी.
लेकिन इसी दौरान वह ऐसे नेटवर्क के संपर्क में आई, जिसने उसकी छवि और भविष्य दोनों को विवादों में डाल दिया. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या राजनीतिक महत्वाकांक्षा ही उसे इस रास्ते तक ले गई या फिर वह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा बनकर इस्तेमाल की गई. मामले में अधिकारियों का कहना है कि राजनीतिक और अन्य कनेक्शनों की भी जांच की जा रही है, आगे और तथ्य सामने आ सकते हैं.सूत्रों के मुताबिक रेशु चौधरी महिला आयोग अध्यक्ष जैसे पद तक पहुंचने की महत्वाकांक्षा रखती थी और इसी के चलते वह तेजी से बड़े राजनीतिक संपर्क बनाने में जुटी हुई थी.
