नई दिल्ली | धार भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के हालिया फैसले को मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। काजी मोइनुद्दीन की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) में तर्क दिया गया है कि हाईकोर्ट का फैसला पुरातात्विक साक्ष्यों और ‘उपासना स्थल अधिनियम, 1991’ की मूल भावना के विपरीत है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वे इस कानूनी लड़ाई को संविधान के दायरे में रहकर लड़ेंगे और जल्द ही इस पर सुनवाई की मांग करेंगे।
हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने कमाल मौला मस्जिद परिसर को वाग्देवी का मंदिर मानते हुए शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को दी गई साप्ताहिक नमाज की अनुमति रद्द कर दी थी। साथ ही, ASI के 2003 के उस आदेश को भी खारिज कर दिया गया था, जिसके तहत नमाज की छूट दी गई थी। मुस्लिम प्रतिनिधियों का दावा है कि वहां पिछले 700 वर्षों से नमाज अदा की जा रही है, जिसके बाधित होने से समुदाय में गहरा दुख है।
मुस्लिम पक्ष के सुप्रीम कोर्ट जाने की आशंका के मद्देनजर हिंदू पक्षकारों ने पहले ही सर्वोच्च न्यायालय में ‘कैविएट’ याचिका दायर कर दी है। इसमें आग्रह किया गया है कि किसी भी प्रकार का एकतरफा आदेश पारित करने से पहले हिंदू पक्ष को अवश्य सुना जाए। फिलहाल, इस संवेदनशील मामले में दोनों समुदायों के अपने-अपने कानूनी दावे हैं, और अब देश की सर्वोच्च अदालत ही इस विवाद पर अंतिम निर्णय लेगी।

