देहरादून | उत्तराखंड में फायर सीजन की शुरुआत के साथ ही वनाग्नि की घटनाओं ने विकराल रूप ले लिया है। 15 फरवरी से अब तक राज्य में आग लगने की 300 से अधिक घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे लगभग 239.47 हेक्टेयर वन भूमि जलकर खाक हो गई है। बढ़ता तापमान, लंबे समय से बारिश का अभाव और सूखी वनस्पति ने पूरे प्रदेश के जंगलों को बारूद के ढेर जैसा संवेदनशील बना दिया है, जिससे हरियाली और वन्यजीवों पर भारी संकट मंडरा रहा है।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा तबाही गढ़वाल मंडल के पौड़ी, टिहरी, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में देखी जा रही है। दुर्गम पहाड़ी रास्तों और तेज हवाओं के कारण दमकलकर्मियों को आग बुझाने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आग की लपटें अब रिहायशी इलाकों के करीब पहुंच गई हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में डर का माहौल है और कई जंगली जानवर जान बचाने के लिए आबादी की ओर पलायन कर रहे हैं।
इस गंभीर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग ने पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। विभाग ने 1,438 फॉरेस्ट फायर स्टेशन और 5,600 से अधिक वॉलेंटियर्स को तैनात किया है, जो चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और मानवीय लापरवाही आग के प्रमुख कारण हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई, तो आने वाले दिन और अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

