विजय शर्मा
भोपाल: भोपाल में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, लेकिन इसके बावजूद शहर के करीब 80 प्रतिशत मकानों और कॉलोनियों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाया गया है. नगर निगम द्वारा वर्ष 2001 से लागू नियमों का प्रभावी पालन नहीं कराने के कारण जल संरक्षण की यह महत्वपूर्ण व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित होकर रह गई है.एक ओर जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में कुओं, बावड़ियों, स्टॉप डेम सहित अन्य जल स्रोतों की सफाई और गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है, ताकि गिरते भूजल स्तर को रोका जा सके और उसमें वृद्धि हो.
वहीं दूसरी ओर मकानों और कॉलोनियों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पा रही है. शहर के करीब 80 प्रतिशत मकानों और कॉलोनियों में यह सिस्टम अब तक नहीं लगा है. जबकि जून 2001 से केंद्रीय भूजल प्राधिकरण और शहरी विकास मंत्रालय द्वारा इसे अनिवार्य किया जा चुका है. इसके बावजूद नियम का पालन नहीं हो रहा है.
उधर, निगम भवन निर्माण और कॉलोनी की अनुमति देने से पहले रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के नाम पर लगभग 12 हजार रुपए तक की सुरक्षा राशि जमा करवाता है, जिसे सिस्टम स्थापित होने के बाद लौटाने का प्रावधान है. यदि इस व्यवस्था को लेकर सख्ती हो तो शहर के गिरते भूजल स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.
इस संबंध में मुख्य सिटी प्लानर नीरज आनंद लिखार से मोबाइल पर संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी.
1500 वर्गफीट से बड़े भवनों में अनिवार्य है व्यवस्था:
नियमों के अनुसार 1500 वर्गफीट या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले मकानों और भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है. जबकि रेन वॉटर हार्वेस्टिंग वाले भवनों को संपत्ति कर में छूट का भी प्रावधान है.सुरक्षा निधि के रूप में निगम के पास जमा हैं करोड़ों रुपएरेन वॉटर हार्वेस्टिंग नियम लागू होने के बाद से भोपाल नगर निगम के पास सुरक्षा निधि के रूप में करोड़ों रुपए जमा हो चुके हैं. इसकी मुख्य वजह यह है कि अधिकांश भवनों में यह सिस्टम लगाया ही नहीं गया. वहीं जिन लोगों ने सिस्टम स्थापित भी किया, वे राशि वापस लेने की प्रक्रिया में होने वाली भागदौड़ और कागजी कार्रवाई से बचने के लिए आवेदन नहीं करते. परिणामस्वरूप यह राशि निगम के खातों में ही पड़ी रहती है.
500 फीट तक नीचे पहुंचा भूजल स्तर
शहर में पिछले कुछ वर्षों में भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है. एक अनुमान के मुताबिक, पहले जहां 200 से 250 फीट की गहराई पर पानी मिल जाता था, वहीं अब छोला और बावड़ियां कलां जैसे क्षेत्रों में पानी 400 से 500 फीट नीचे पहुंच चुका है. केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार, पिछले एक दशक में भोपाल के भूजल स्तर में करीब 66 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है.
क्या है रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
रेन वॉटर हार्वेस्टिंग ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें मकानों और बड़े भवनों की छतों पर गिरने वाले बारिश के पानी को पाइपलाइन के जरिए जमीन के भीतर पहुंचाया जाता है इसके लिए निर्माण के दौरान खुले स्थान पर गड्ढा या बोरवेल बनाया जाता है, जिससे वर्षा जल सीधे भूजल स्तर तक पहुंच सके. यह व्यवस्था भूजल संरक्षण के साथ-साथ बारिश के पानी की बर्बादी रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है
