रूस और चीन ने व्यापार, ऊर्जा और वैश्विक व्यवस्था पर 20 समझौतों के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत किया

बीजिंग, 20 मई (वार्ता) रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी साझेदारी को “रणनीतिक” बताते हुए अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, परिवहन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग सहित प्रमुख क्षेत्रों को शामिल करते हुए 20 समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं। श्री पुतिन और श्री जिनपिंग ने अपनी साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से संयुक्त बयान जारी किया है। इसके साथ ही एक बहुध्रुवीय दुनिया और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए एक नये ढांचे का समर्थन करने वाली घोषणा भी जारी की गई है। श्री पुतिन ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार “पिछले 25 वर्षों में 30 गुना से अधिक” बढ़ा है और “लगातार कई वर्षों तक 200 अरब डॉलर के आंकड़े से ऊपर” बना रहा है। बैठक के श्री पुतिन ने कहा कि रूस और चीन ने एक स्थिर व्यापार प्रणाली विकसित की है जो बाहरी दबाव और वैश्विक बाजार की अस्थिरता के प्रति कम संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि आपसी लेन-देन में रूबल और युआन का इस्तेमाल बढ़ाने से “आर्थिक संबंधों को सुरक्षित रखने और ज़्यादा स्थिरता सुनिश्चित करने” में मदद मिली है और अब लगभग सारा व्यापार राष्ट्रीय मुद्राओं में ही होता है।

श्री पुतिन ने “चीन को तेल और गैस की बिना किसी रुकावट के आपूर्ति जारी रखने” के लिए रूस की तत्परता पर भी ज़ोर दिया। साथ ही बताया कि रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा निगम रोसाटॉम चीन के परमाणु संयंत्रों में नयी बिजली इकाइयाँ पूरी कर रही है, जो ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को दर्शाता है। इस साझेदारी को “वैश्विक मामलों में एक स्थिर करने वाली शक्ति” बताते हुए श्री पुतिन ने लोगों के बीच बढ़ते संबंधों की ओर इशारा किया, जिसमें वीज़ा-मुक्त व्यवस्था के तहत यात्रा में हुई बढ़ोतरी भी शामिल है। उन्होंने कहा कि 2025 में 20 लाख से ज़्यादा रूसियों ने चीन की यात्रा की, जबकि 10 लाख से ज़्यादा चीनी नागरिकों ने रूस की यात्रा की। उन्होंने कहा कि रूस-चीन संबंध एक अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच गए हैं, और इन्हें व्यापक रणनीतिक सहयोग का एक ऐसा आदर्श बताया जो बाहरी दबावों के बावजूद मज़बूत बना रहा है। श्री पुतिन ने कहा कि ऊर्जा आपसी आर्थिक संबंधों का एक मुख्य आधार बनी हुई है, और रूस चीन को ऊर्जा की आपूर्ति करने वाला एक प्रमुख देश बना हुआ है।

बुधवार को हुई बातचीत के बाद रूस और चीन की ओर से जारी एक संयुक्त घोषणा के अनुसार, दोनों देश अपनी सशस्त्र सेनाओं के बीच दोस्ती को मज़बूत करेंगे और विभिन्न चुनौतियों तथा खतरों का मिलकर सामना करेंगे। इस दस्तावेज़ में कहा गया है, “दोनों पक्ष अपने देशों की सशस्त्र सेनाओं के बीच चली आ रही पारंपरिक दोस्ती को और मज़बूत करेंगे, सैन्य क्षेत्र में आपसी विश्वास को गहरा करेंगे, सहयोग के तंत्रों में सुधार लाएंगे, संयुक्त अभ्यास तथा हवाई और समुद्री गश्त की विधियों का विस्तार करेंगे, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय और आपसी तालमेल को सुदृढ़ करेंगे, विभिन्न चुनौतियों और खतरों का मिलकर सामना करेंगे, और वैश्विक तथा क्षेत्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता को बनाए रखेंगे।”

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