
जबलपुर। महाधिवक्ता कार्यालय में विधि अधिकारियों की नियुक्ति में नियम का पालन नही किये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता कार्यालय की तरफ से जवाब पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस आर सी एस विसेन की युगलपीठ ने अंतिम अवसर प्रदान करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 19 जून निर्धारित की गयी है।
मप्र हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव योगेश सोनी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि महाधिवक्ता कार्यालय में कुल 157 लॉ ऑफिसर्स की नियुक्ति को लेकर 25 दिसंबर को सूची जारी की गई है। उन्होंने याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह मनमानी और पक्षपातपूर्ण है। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2013 की राजपत्र अधिसूचना में सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट और निर्धारित प्रक्रिया तय की गई है, लेकिन महाधिवक्ता कार्यालय ने उसका स्पष्ट उल्लंघन किया। अधिसूचना में कहा गया था कि सरकारी अधिवक्ता की नियुक्ति के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की प्रेक्टिस की योग्यता निर्धारित है। इसके उलट कई शासकीय अधिवक्ता ऐसे हैं जिनकी प्रेक्टिस 10 साल से बहुत कम है। यह दलील भी दी गई कि एक पद पर नियुक्ति के लिए तीन नाम भेजने का प्रावधान था। इसके उलट विज्ञापन में पदों की संख्या नहीं बताई गई थी। इसके अलावा नियुक्ति प्रक्रिया के संबंध में भी कोई उल्लेख नहीं किया गया था। मांग की गई कि पूरी सूची निरस्त कर नए सिरे से प्रक्रिया अपनाई जाये। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के बाद युगलपीठ ने जवाब पेश करने अंतिम अवसर प्रदान किया है।
