ओस्लो 18 मई (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि वैश्चिक अस्थिरता के माहौल के बीच भारत और यूरोप के संबंध स्वर्णिम युग में प्रवेश कर रहे हैं और इसके अंतर्गत भारत तथा नार्वें ने अपने संबंधों को ‘ग्रीन स्ट्रटीजिक पार्ट्नर्शिप’ के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया है। इस साझेदारी में दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा से लेकर जलवायु लचीलापन, समुद्री अर्थव्यवस्था से लेकर हरित नौवहन तक, हर क्षेत्र में भारत के विस्तार, गति तथा प्रतिभा को नॉर्वे की प्रौद्योगिकी और पूंजी के साथ जोड़कर हमारी कंपनी वैश्विक समाधान विकसित करेंगी। पांच देशों की यात्रा के चौथे चरण में नार्वे की दो दिन की यात्रा पर आये श्री मोदी ने सोमवार को यहां नार्वें के प्रधानमंत्री योनास गार स्तोरे के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त वक्तव्य में कहा कि आज विश्व एक अस्थिरता और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में, भारत और यूरोप, अपने संबंधों के एक नए स्वर्णिम युग में प्रवेश कर रहे है।
दोनों पक्षों ने व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं और इसके वादों को हकीकत में बदलने के लिए भारत और नार्वे ने आज कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये हैं। प्रधानमंत्री ने कहा,” हमने स्थिरता, महासागरीय ऊर्जा, भूविज्ञान और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनाई है। इंजीनियरिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर और डिजिटल जैसे क्षेत्रों में हम अपने विश्वविद्यालयों और नवाचार आधारित उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र को जोड़कर अपनी साझेदारी को भविष्य के लिए तैयार बनाएंगे। कौशल विकास और प्रतिभा गतिशीलता में भी हमारा सहयोग और अधिक व्यापक होने जा रहा है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को ‘ग्रीन स्ट्रटीजिक पार्ट्नर्शिप’ में बदलना इनमें से प्रमुख निर्णय है। इस साझेदारी में दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा से लेकर जलवायु लचीलापन, समुद्री अर्थव्यवस्था से लेकर हरित नौवहन तक, हर क्षेत्र में भारत के विस्तार, गति तथा प्रतिभा को नॉर्वे की प्रौद्योगिकी और पूंजी के साथ जोड़कर हमारी कंपनी वैश्विक समाधान विकसित करेंगी।

