रेल परियोजना: कब्जा नोटिस बिना बेदखली की तैयारी?

सिंगरौली: ललितपुर–सिंगरौली नई रेल लाइन परियोजना को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई विवादों के घेरे में आ गई है। उपखंड मजिस्ट्रेट देवसर द्वारा 14 मई 2026 को जारी आम सूचना में प्रभावित गांवों के लोगों को अधिग्रहित भूमि से मकान हटाने एवं नए निर्माण कार्य बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में चेतावनी दी गई है कि निर्देशों का पालन नहीं करने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।हालांकि, परियोजना प्रभावित ग्रामीणों और भू-स्वामियों ने इस कार्रवाई को विधि-विरुद्ध बताते हुए गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। प्रभावितों का आरोप है कि भू-अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 38 के तहत कब्जा लेने से पूर्व दी जाने वाली अनिवार्य नोटिस अब तक हितग्राहियों को प्रदान नहीं की गई है। ऐसे में प्रशासन द्वारा मकान हटाने और भूमि खाली कराने की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के विपरीत है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन न्यायालयों के अवकाश का इंतजार कर रहा था और जैसे ही सिविल मामलों की नियमित सुनवाई बंद हुई, तुरंत यह आदेश जारी कर प्रभावित परिवारों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया गया। लोगों का आरोप है कि बिना वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण किए भूमि और मकानों से बेदखल करने की तैयारी की जा रही है, जो उनके संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
मुआवजा और रोजगार को लेकर भी नाराजगी
परियोजना प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया कि अब तक बड़ी संख्या में लोगों को पूर्ण प्रतिकर राशि प्राप्त नहीं हुई है। कई किसानों का कहना है कि उन्हें वास्तविक बाजार मूल्य से कम मुआवजा दिया गया, जबकि अनेक परिवारों को अब तक पूरी राशि भी नहीं मिल सकी है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उनकी भूमि और मकानों का अधिग्रहण किए जाने के बावजूद न तो परिवार के एक सदस्य को रोजगार दिया गया और न ही रोजगार के बदले ₹5 लाख की वैकल्पिक सहायता राशि उपलब्ध कराई गई। प्रभावितों ने दावा किया कि वर्ष 2018 में कलेक्टर और रेलवे के उपमुख्य अभियंता के बीच रोजगार देने संबंधी अनुबंध हुआ था, लेकिन बाद में प्रक्रिया वापस ले ली गई।
लंबित मामलों के बीच कार्रवाई पर सवाल
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अधिग्रहण क्षेत्र में अब भी कई मामलों में आपत्तियां, प्रतिकर विवाद, पात्रता निर्धारण और पुनर्वास संबंधी प्रक्रियाएं लंबित हैं। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा मकान तोड़ने और भूमि खाली कराने की कार्रवाई शुरू करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
प्रभावित परिवारों ने मांग की है कि जब तक धारा 38 के तहत वैधानिक कब्जा नोटिस जारी न हो, सभी प्रभावितों को पूर्ण प्रतिकर न मिले तथा पुनर्वास और रोजगार संबंधी दायित्व पूरे न किए जाएं, तब तक किसी भी प्रकार की बेदखली या तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।

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