नई दिल्ली | देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों ने केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए प्रधानमंत्री को ‘महंगाई मैन’ करार दिया और आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव खत्म होते ही सरकार ने जनता पर ‘महंगाई का चाबुक’ चला दिया है। पार्टी ने इसे ‘मोदी की जबरन वसूली’ बताते हुए कहा कि चुनाव के दौरान शांत रहने वाली कीमतें अब आम जनता की जेब पर हंटर चला रही हैं।
ईंधन की नई दरों को लेकर विपक्षी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि पहले वोट लूटे जाते हैं और फिर जनता को महंगाई से चोट पहुंचाई जाती है। वहीं, शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने गिरते रुपये और बढ़ती तेल कीमतों पर कटाक्ष करते हुए पूछा कि आखिर कौन पहले ‘सेंचुरी’ पार करेगा। विपक्ष का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का बहाना बनाकर सरकार घरेलू बाजार में मुनाफाखोरी कर रही है और सीएनजी के दाम बढ़ाकर मध्यम वर्ग की कमर तोड़ रही है।
ईंधन की कीमतों में यह उछाल पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ऊर्जा संकट के बीच आया है। होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक रुकावटों और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। तेल कंपनियों का कहना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने से लागत बढ़ी है। हालांकि, भारत सरकार ने आश्वस्त किया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और ऊर्जा भंडार पर्याप्त हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में महंगाई को लेकर छिड़ी यह जंग थमती नजर नहीं आ रही है।

