चाइल्ड बजटिंग कार्यशाला: 19 विभागों के समन्वय से संवरेगा प्रदेश के 3 करोड़ बच्चों का भविष्य

भोपाल।महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि प्रदेश के बच्चों का सर्वांगीण विकास ही राज्य के सतत एवं समावेशी विकास की आधारशिला बनेगा।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सुश्री भूरिया ने बुधवार को यहां होटल कोर्टयार्ड मैरियट में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘चाइल्ड बजटिंग इन मध्यप्रदेश’ विषयक प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2026-27 के राज्य बजट में बच्चों के सर्वांगीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष बाल विकास से जुड़े प्रावधानों में 26 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है। स्वास्थ्य एवं पोषण क्षेत्र के लिए 23 हजार 747 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें ‘पोषण 2.0’ जैसी योजनाएं शामिल हैं। वहीं राज्य के कुल व्यय का 13.7 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च करने के लिए निर्धारित किया गया है।

मंत्री ने कहा कि बच्चों का विकास केवल महिला एवं बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। चाइल्ड बजट स्टेटमेंट में अब 19 विभागों को शामिल किया गया है और स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य तथा सामाजिक न्याय सहित सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के 55 जिलों की स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना तैयार की जाए, क्योंकि प्रत्येक जिले में बच्चों की जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं।

महिला एवं बाल विकास आयुक्त सुश्री निधि निवेदिता ने कहा कि राज्य की लगभग 40 प्रतिशत आबादी तीन करोड़ बच्चों की है। उन्होंने चाइल्ड बजट की रिपोर्टिंग को अधिक वैज्ञानिक एवं पारदर्शी बनाने पर जोर देते हुए कहा कि विभागों को केवल आंकड़ों पर नहीं बल्कि योजनाओं के वास्तविक प्रभाव पर ध्यान देना होगा।

यूनिसेफ मध्यप्रदेश के चीफ फील्ड ऑफिसर विलियम हैनलोन जूनियर ने कहा कि मध्यप्रदेश ‘चाइल्ड बजटिंग’ के पांच सफल वर्ष पूरे कर चुका है और अब परिणाम आधारित बजटिंग की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में लिंग एवं भौगोलिक समानता को ध्यान में रखते हुए बजट प्रावधान सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई।

यूनिसेफ की सोशल पॉलिसी चीफ सुश्री क्रिस्टीना पोपीवानोवा ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बच्चों में निवेश को उत्पादकता आधारित दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक अभिताभ अवस्थी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बाल बजट के अंतर्गत 75 हजार 587 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो राज्य के कुल बजट का 19.4 प्रतिशत तथा सकल घरेलू उत्पाद का 4.1 प्रतिशत है।

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