
भोपाल। मध्यप्रदेश में शासकीय कर्मचारियों को पिछले लगभग एक दशक से पदोन्नति नहीं मिलने के कारण प्रशासनिक तंत्र में निराशा और असंतोष का माहौल गहराता जा रहा है। मंत्रालय सेवा अधिकारी/कर्मचारी संघ के अध्यक्ष इंजी. सुधीर नायक ने आरोप लगाया कि पदोन्नति प्रक्रिया “प्रशासनिक पलायन और पक्षपात” का शिकार रही है, जिससे कर्मचारियों का मनोबल लगातार गिर रहा है।
नायक ने कहा कि राज्य की नौकरशाही की कार्यक्षमता और उत्साह पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि जहां वरिष्ठ अधिकारियों को समय पर पदोन्नति मिल रही है, वहीं अधीनस्थ कर्मचारी वर्षों से कैरियर उन्नति से वंचित हैं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था में हताशा बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि उत्साहहीन कर्मचारियों के बल पर सुशासन का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता और इसका खामियाजा प्रदेश की आठ करोड़ जनता भुगत रही है।
नायक ने आरोप लगाया कि उन्होंने सरकार को कई व्यावहारिक समाधान सुझाए थे, जिनमें राज्य प्रशासनिक सेवा की तर्ज पर समयमान वेतनमान के साथ उच्च पदनाम देने का प्रस्ताव भी शामिल था, लेकिन इन सुझावों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने पदोन्नति नियमों में संशोधन कर आरक्षण संतुलन बनाए रखने, वरिष्ठता की रक्षा करने तथा वर्ष 2016 से लंबित पदोन्नतियां लागू करने की मांग की। उनके अनुसार, इससे लंबे समय से चला आ रहा विवाद निष्पक्ष और न्यायसंगत तरीके से सुलझाया जा सकता है।
