सौहार्दपूर्ण तरीके से हुए 1 लाख 14 हजार प्रकरणों का निराकरण

जबलपुर। इस वर्ष की दूसरी नेशनल लोक अदालत में आपसी समझौते से लगभग 1 लाख 14 हजार प्रकरणो को निराकरण किया गया। प्रकरणों का निराकरण करते हुए 4 अरब 40 लाख रुपये के अवार्ड पारित किये गये। समाचार लिखे जाने तक पूरे आंकड़े प्राप्त नहीं हुए थे।

इस वर्ष की दूसरी नेशनल लोक अदालत का डिजिटल तौर पर उद्घाटन किया मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने मुख्य न्यायाधीश तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संरक्षक जस्टिस संजीव सचदेवा के द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत सभी नागरिकों के लिए सुलभ, त्वरित और किफायती न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस वर्ष की पहली लोक अदालत में आपसी समझौते से 1.88 लाख प्रकरणों को निराकरण करते हुए 70 करोड़ रुपये के अवार्ड पारित किये गये थे। लोक अदालत से सिर्फ अदालतों को बोझ कम नहीं होता है बल्कि विवादों के सौहार्दपूर्ण निपटारे से सामाजिक सद्भावना को भी बढ़ावा मिलता है। वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्रो में लोगों के बढ़ते विश्वास को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का आव्हान किया।

इस अवसर पर मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस विवेक रूसिया ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय सुनिश्चित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। समाज की सच्ची प्रगति न्याय व्यवस्था को मजबूत करने में निहित है। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास बढ़ाने और मानवीय समाधान को प्रोत्साहित करने में जिला न्यायपालिका और अधिवक्ताओं की भूमिका आवश्यक है।

राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रदेश में कुल 1467 पीठ का गठन किया गया था। उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ जबलपुर, खंडपीठ इंदौर व ग्वालियर में आठ पीठ का गठन किया गया था। जिला व क्षेत्रीय स्तर पर 1459 पीठ का गठन किया गया था।

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