नई दिल्ली | 15 जनवरी, 2026: बांग्लादेश में जारी राजनीतिक अस्थिरता और अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा ने वहां शिक्षा प्राप्त कर रहे भारतीय छात्रों के मन में गहरा खौफ पैदा कर दिया है। ‘यूरेशिया रिव्यू’ की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ढाका और अन्य शहरों में पढ़ रहे भारतीय छात्र सुरक्षा कारणों से शाम ढलते ही खुद को हॉस्टल के कमरों में कैद कर लेते हैं। ये छात्र बाहर निकलते समय अपना असली लहजा और पहचान छिपाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि किसी हिंसक भीड़ का निशाना न बनें। प्रशासन के ढुलमुल रवैये के बीच छात्रों के परिजनों ने भारत सरकार से कूटनीतिक हस्तक्षेप और सुरक्षित घर वापसी की अपील की है।
वर्तमान में बांग्लादेश में लगभग 9,000 से अधिक भारतीय मेडिकल छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। भारत में सरकारी मेडिकल सीटों की भारी कमी और निजी कॉलेजों की आसमान छूती फीस के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्र बांग्लादेश को एक सस्ते विकल्प के रूप में चुनते हैं। भारत में जहां 20 लाख आवेदकों के लिए महज 60,000 सरकारी सीटें हैं, वहीं बांग्लादेश में मेडिकल की पढ़ाई का खर्च भारतीय निजी संस्थानों के मुकाबले लगभग आधा है। यही आर्थिक मजबूरी भारतीय छात्रों को जान जोखिम में डालकर पड़ोसी देश में रहने को विवश कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी छात्रों के खिलाफ बढ़ती हिंसा बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। विश्वविद्यालयों को केवल कर्फ्यू लगाने के बजाय ‘शून्य सहनशीलता’ (Zero Tolerance) की नीति अपनाकर हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। यदि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो भविष्य में भारतीय छात्र बांग्लादेश जाने से पूरी तरह परहेज करेंगे। भारत सरकार भी इस मामले को कूटनीतिक स्तर पर उठाकर अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की तैयारी कर रही है, ताकि छात्रों का खोया हुआ विश्वास बहाल हो सके।

