श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सुनाया परीक्षित एवं कथा महात्म का प्रसंग

ग्वालियर। श्री मदनमोहन मंदिर, मुरार पर चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन राजा परीक्षित जन्म की कथा सुनाई गई। कथावाचक भागवत आचार्य सतीश कौशिक ने कहा कि जन्म-जन्मांतर और युग-युगांतर में जब पुण्य का उदय होता है, तब ऐसा अनुष्ठान होता है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से पापी भी पाप मुक्त हो जाते हैं। वेदों का सार युगों-युगों से मानवजाति तक पहुंचाता रहा है।

उन्होंने कहा कि भागवत पुराण उसी सनातन ज्ञान का प्रवाह है जो वेदों से प्रवाहित होती चली आई है। इसलिए भागवत महापुराण को वेदों का सार कहा गया है। उन्होंने कहा कि युद्ध में गुरु द्रोण के मारे जाने पर उनके पुत्र अश्वत्थामा ने क्रोधित होकर पांडवों को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया। वहीं दूसरी ओर अभिमन्यु की गर्भवती पत्नी उत्तरा के गर्भ से परीक्षित का जन्म हुआ। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

कथा की आरती परीक्षित डॉ राम अवतार दुबे, श्रीमती राजकुमारी दुबे, रामशंकर दुबे, अमरीश शर्मा, महेन्द्र समाधिया ने की।

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