इंदौर: केंद्र और राज्य सरकार की मंशा के विपरीत, कागजी त्रुटियों और प्रशासनिक शिथिलता के कारण कई पात्र बुजुर्गों को पेंशन से वंचित होना पड़ रहा है. कई लाभार्थियों को पेंशन मिलने के बावजूद बीच-बीच में राशि बंद होने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. दस्तावेजी खामियां दूर करने के लिए चक्कर काटने के बावजूद बुजुर्गों की समस्या का समाधान नही हो रहा है. यह वृद्धजनों के लिए अत्यंत चिंताजनक है.
वृद्धा पेंशन योजना को लेकर मूसाखेड़ी क्षेत्र स्थित चिराड़ मोहल्ले से गंभीर मामला सामने आया है. यहां केंद्र और राज्य सरकार द्वारा बुजुर्गों को आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से संचालित पेंशन योजना का लाभ आज भी कई जरूरतमंद वृद्धजनों तक नहीं पहुंच पा रहा. क्षेत्र में कई ऐसे बुजुर्ग मिले, जिनकी उम्र 65 से 70 वर्ष के बीच है, लेकिन दस्तावेजों में छोटी-मोटी त्रुटियों के कारण उनकी पेंशन स्वीकृत नहीं हो सकी.
वहीं, कुछ हितग्राहियों ने बताया कि उन्हें पेंशन का लाभ तो मिल रहा है लेकिन बीच-बीच में पेंशन बंद हो जाने से परेशानियां बढ़ जाती हैं. सैकड़ों बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद अधिकारी उनकी मदद करने के बजाय काम को टालते रहते हैं. ऐसी समस्याओं का निपटान करने के लिए प्रशासन को शिविर लगाने की पहल करना चाहिए, जिससे पात्र वृद्धजनों के दस्तावेज सुधार कर तत्काल पेंशन शुरू की जाए, ताकि बुजुर्गों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने में सहायता मिल सके.
यह बोले हितग्राही…
कार्यालय पर जाता हूं तो मुझसे गरीबी रेखा का राशन कार्ड मांगते हैं, जबकि गरीबी रेखा का राशन कार्ड कई सालों से प्रशासन द्वारा बनाना बंद कर दिया गया है.
– नंदकिशोर हांडे
आधार कार्ड में मेरी आयु कम कर दी गई, जबकि मैं 70 वर्ष का हो चुका हूं. घर में अकेला हूं, किस-किस कार्यालय के चक्कर लगाऊं, प्रशासन को शिविर लगाना चाहिए.
– बाबूलाल सुखलाल
सालों से मिलने वाली पेंशन अचानक एक साल से बंद कर दी गई, अभी दो महीने हुए दोबारा पेंशन चालू हुई है, 600 रुपए से वृद्धजनों को थोड़ी राहत मिलती है.
– गीता नागा
