देश के भविष्योन्मुखी विकास के लिए सस्ती बिजली जरूरी : अनिल अग्रवाल

नयी दिल्ली, 06 जनवरी (वार्ता) देश के भविष्योन्मुखी विकास के लिए ऊर्जा के महत्व को रेखांकित करते हुए वेदांता समूह के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने मंगलवार को कहा कि विकास के लिए सस्ती बिजली जरूरी है।

विजुअल कैपिटलिस्ट का एक ग्राफ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए उन्होंने लिखा, “भारत के पास बिजली (पारंपरिक और नवीकरणीय) उत्पादन और पारेषण में बड़ा अवसर है। हमें घरेलू इस्तेमाल के लिए, फैक्ट्रियों के लिए और डाटा सेंटरों के लिए सस्ती बिजली आपूर्ति करनी है।”

उन्होंने परियोजनाओं में तेजी लाने और नीति को सरल बनाने की वकालत करते हुए लिखा कि बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण एक ही नीति का हिस्सा होने चाहिये। कंपनियों को हर पहलू पर काम करना चाहिये। ऐसा करके ही वर्तमान में भविष्योन्मुखी बना जा सकता है।

श्री अग्रवाल ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और महत्वपूर्ण खनिजों से संचालित भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं को आकार देने में सस्ती और सुरक्षित बिजली की भूमिका बेहद अहम होगी।

ग्राफ के आंकड़ों के हवाले से उन्होंने कहा कि आज चीन की बिजली उत्पादन क्षमता अमेरिका की तुलना में लगभग दोगुनी है, जबकि उसकी अर्थव्यवस्था का आकार अमेरिका से काफी छोटा है। बिजली अवसंरचना में किया गया यह दीर्घकालिक निवेश एआई के दौर में एक बड़ी बढ़त साबित होगा, जहां डेटा सेंटर्स, उन्नत विनिर्माण और खनिज प्रसंस्करण जैसे क्षेत्र अत्यधिक ऊर्जा-आधारित हैं।

ग्राफ के अनुसार, चीन ने साल 2024 में 10.1 हजार टेरा वाट आवर (टीडब्ल्यूएच) बिजली का उत्पादन किया जबकि अमेरिका में उत्पादन 4.4 हजार टीडब्ल्यूएच रहा। यूरोपीय संघ 2.7 हजार, भारत 2.1 हजार और जापान एक हजार टेरा वाट आवर के साथ शीर्ष पांच में रहे।

श्री अग्रवाल ने कहा कि अमेरिका पहले से ही बिजली की कमी का सामना कर रहा है। एआई के तेजी से विस्तार के कारण बड़ी मात्रा में बिजली की खपत हो रही है। इससे अन्य औद्योगिक गतिविधियों के लिए कम बिजली बचती है और महंगी होती है। श्री अग्रवाल के अनुसार, यह असंतुलन समय के साथ औद्योगिक प्रतिस्पर्धा की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

 

 

 

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