कानून का गलत उपयोग करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन, एफआईआर रद्द 

जबलपुर। मशहूर शायर शोएब कियानी की मशहूर उर्दू नज़्म ‘बेहया’ का एक हिस्सा सोशल मीडिया में वायरल करने पर पुलिस के द्वारा प्रकरण दर्ज किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस बीपी शर्मा की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता ने पब्लिक डोमेन में उपलब्ध नज्म का हिस्सा सोशल मीडिया में शेयर किया है। नज़्म में शब्दों में उसने किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की है। कड़े शब्दों में राय व आलोचना करना मौलिक अधिकार के तहत है सुरक्षा प्रदान करता है। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ एफआईआर को निरस्त करने के आदेश जारी किये है।

बैतूल निवासी फैजान अंसारी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि वह पेशे से शिक्षक है और रिकाॅर्ड बेदाग है और उनके खिलाफ कोई अपराधिक प्रकरण दर्ज नही है। उन्होने 22 जुलाई को अपने सोशल मीडिया में नज्म ‘बेहया’ का एक हिस्सा अपलोड किया था। याचिकाकर्ता की तरफ से कोई कमेंट, बदलाव या मैसेज नहीं किया गया था। चिचोली पुलिस ने याचिकाकर्ता को शाम को फोन कर बुलाया और मोबाइल जब्त कर लिया। उसके खिलाफ शिकायत की गयी कि वीडियो का कंटेंट आपत्तिजनक था, कथित तौर पर महिलाओं से नफरत करने वाला था। पुलिस ने उसके खिलाफ धारा 353(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया।

एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि कानून की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल और संविधान के आर्टिकल 19(1) के तहत मौलिक अधिकारों का गलत उल्लंघन है। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के आदेश जारी किये है।

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