नयी दिल्ली, (वार्ता) भारत ने कनाडा के मामलों में दखल देने के वहां की खुफिया सुरक्षा एजेंसी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें ” निराधार की बात” करार दिया है। भारत ने इस बात को रेखांकित किया है कि उल्टे उसकी एजेंसी की खुफिया रिपोर्ट में यह बात कही गयी है कि कनाडा में मौजूद खालिस्तानी चरमपंथी गुट दोनों देशों के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।
कनाडा की सुरक्षा खुफिया सेवा (सीएसआईएस) की 2025 की सार्वजनिक की गयी रिपोर्ट के बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस मुद्दे पर भारत का रुख “स्पष्ट और एक जैसा” रहा है। उन्होंने दोहराया कि दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में दखल देना भारत की नीति नहीं है।
श्री जायसवाल ने कहा, “भारत लगातार इस बात पर चिंता जताता रहा है कि भारत विरोधी चरमपंथी और अलगाववादी तत्व कनाडाई धरती का इस्तेमाल सुरक्षित पनाहगाह की तरह कर रहे हैं। सीएसआईएस के आकलन में कनाडा में खालिस्तान अलगाववादी आंदोलन के समर्थकों की मौजूदगी को स्वीकार किया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि कनाडा में मौजूद खालिस्तानी चरमपंथी समूह न केवल भारत के लिए, बल्कि कनाडा के लिए भी राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा बने हुए हैं।”
प्रवक्ता ने कहा कि रिपोर्ट में खुद इस बात को उजागर किया गया है कि कैसे ऐसे तत्व “लोकतांत्रिक आज़ादी और संस्थाओं का गलत इस्तेमाल करके चरमपंथ को बढ़ावा देते हैं और ऐसी धनराशि जुटाते हैं, जिनका इस्तेमाल हिंसक गतिविधियों के लिए किया जाता है।”
इस सार्वजनिक रिपोर्ट में कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथी समूहों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक जीवंत चिंता बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे समूह लगातार हिंसक चरमपंथी गतिविधियों में लगे रहते हैं जो “कनाडा और कनाडा के हितों के लिए खतरा है।”
इसमें यह भी कहा गया है कि इन समूहों के कुछ सदस्यों के कनाडा के नागरिकों के साथ अच्छे संबंध हैं और वे “अपनी हिंसक चरमपंथी सोच को बढ़ावा देने के लिए कनाडा की संस्थाओं का इस्तेमाल करते हैं और अनजान लोगों से फंड इकट्ठा करते हैं, जिनका इस्तेमाल बाद में हिंसक गतिविधियों के लिए किया जाता है।”
रिपोर्ट में यह आरोप भी लगाया गया है कि भारत ने कनाडा के राजनेताओं, पत्रकारों और भारत-कनाडाई समुदाय के सदस्यों के साथ गुपचुप रिश्ते बनाए हैं, ताकि वह अपना प्रभाव जमा सके और खालिस्तान अलगाववाद से जुड़े कथित खतरों का मुकाबला कर सके। इसमें देश के बाहर से कुछ कथित दमनकारी गतिविधियों का भी आरोप है जिनमें निगरानी रखने और दबाव बनाने के तरीकों के इस्तेमाल जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और चरमपंथ के बीच फर्क किया गया है। इसमें कहा गया है कि “खालिस्तान देश बनाने के लिए अहिंसक तरीके से अपनी बात रखना चरमपंथ नहीं माना जाता है।” रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कि केवल एक छोटा सा समूह ही जो कनाडा को अपना अड्डा बनाकर हिंसा को बढ़ावा देता है या उसकी योजना बनाता है, उसे ही खालिस्तानी चरमपंथी माना जाता है।
गौरतलब है कि 2023 में तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा की धरती पर सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार के संभावित हाथ होने का आरोप लगाया था। उसके बाद भारत-कनाडा संबंधों में तब भारी गिरावट आ गयी थी। भारत ने उन आरोपों को भी बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया था।
