गवाहों के बयान होने चाहिये भरोसेमंद, हाईकोर्ट ने सरकार की अपील को किया खारिज

जबलपुर। आत्महत्या के लिए प्रेरित किये जाने के मामले में जिला न्यायालय द्वारा आरोपियों को दोषमुक्त किये जाने के खिलाफ सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में अपील दायर की गयी थी। हाईकोर्ट जस्टिस आर के वाणी की एकलपीठ ने पाया कि गवाहों के बयान में विरोधाभास है। एकलपीठ ने सरकार की अपील को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा है कि गवाहों के बयान भरोसेमंद व संदेह मुक्त होना चाहिये।

सरकार की तरफ से दायर अपील में कहा गया था कि कटनी के स्लीमनाबाद थानान्तर्गत रहने वाली विमला बाई ने आग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के पहले उसका किरण गुप्ता तथा उसकी माँ राधा से विवाद हो गया था और उन्होने गंदी-गंदी गाली देते हुए उसके मरने के लिए कहा था। इसके अलावा राधा के बेटे दिलीप ने उसे कमरे में बंद कर दिया था।

जिसके बाद पीडिता ने आत्महत्या के लिए खुद को आग लगा ली। पीड़ित को गंभीर अवस्था में उपचार के लिए पहले कटनी फिर जबलपुर में भर्ती किया गया था। पीड़िता ने अपने बयान में कहा गया था कि आरोपियों के द्वारा अपशब्द करते तथा कमरे में बंद करने के कारण उसने आत्महत्या की है। इसके बावजूद भी जिला न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश के साथ सरकार की अपील को खारिज कर दी।

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