
दतिया। दतिया में अंतिम सांसे गिन रहें हैं तालाब जो विलुप्त होने की कगार पर हैं। एक समय था जब दतिया नगर को तालाबों की नगरी कहा जाता था और संपूर्ण नगर की प्यास बुझाने का कार्य यही तालाब करते थे। दतिया नगर चारों तरफ से तालाबों से घिरा हुआ था। यही तालाब दतिया नगर की सुंदरता में चार चांद लगाते थे। परंतु समय का पहिया ऐसा घूमा कि आज यह तालाब अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं। तालाबों पर जलकुंभी ने अपना कब्जा जमा लिया है जिससे यह तालाब अब विलुप्त होने की कगार पर हैं।
पूर्व गृहमंत्री डॉ मिश्रा ने तालाबों के कायाकल्प के लिए प्रयास किए
पूर्व गृहमंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा ने तालाबों के विकास के लिए अनेक प्रकार के प्रयास किए परंतु देखरेख के अभाव में तालाब दुर्दशा के शिकार हो गए। चारों तरफ़ से गंदगी और अतिक्रमण होने से तालाब अपना अस्तित्व खोते जा रहें हैं और पोखर से नज़र आने लगे हैं।
*यह हैं दतिया नगर के मुख्य तालाब जो हैं दुर्दशा का शिकार*
दतिया नगर के मुख्य तालाब जो देख रेख के अभाव में दम तोड़ रहें हैं और विलुप्त होने के कगार पर हैं, उनमें सीता सागर तालाब, लाला का तालाब, तरण तारण, करन सागर, राधा सागर, लक्ष्मण तालाब, राम सागर आदि शामिल हैं। यदि अभी भी समय रहते इन तालाबों की देखरेख और संरक्षण कर लिया जाए तो यह फ़िर से अपने पुराने स्वरूप में लौट सकते हैं। इसके लिए प्रशासन, नगर पालिका परिषद दतिया, समाज सेवी संस्थाओ, दतिया नगर के वरिष्ठजनों के सहयोग से ही यह तालाब अपने पुराने स्वरूप में लौट सकते हैं।
*पूर्व में अनेक बार तालाबों को गंदगी से मुक्त करने चलाए गए अभियान*
पूर्व में नवभारत समाचार पत्र ने ग्वालियर की सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से इन तालाबों को गंदगीमुक्त करने के लिए अभियान चलाए थें जिसमें काफ़ी तक सफ़लता भी मिलीं थी। यदि समय रहते प्रशासन और नगर पालिका परिषद दतिया ने इन तालाबों के लिए कुछ नहीं किया गया तो बहुत जल्द ही यह विलुप्त हों जाएंगे और फ़िर हम सब कहेंगे कि दतिया कभी तालाबों की नगरी हुआ करती थी।
