जबलपुर: कुछ सफर मंजिल तक पहुँचने के लिए नहीं, बल्कि जिंदगी को हमेशा के लिए एक अधूरी दास्तान बनाने के लिए होते हैं। ऐसा ही सफर बरगी बांध का था जहां की लहरें जो कभी सुकून का अहसास कराती थीं, वे आज अपनों को खोने वाले परिवारों के लिए उम्र भर का नासूर बनकर रह गई हैं। गुरूवार की शाम ऐसी ही थी जहाँ खुशियों का शोर, मौत के सन्नाटे में बदल गया था। कुदरत की खूबसूरती को निहारने निकले सैलानियों को अंदाजा भी नहीं था कि जिस पानी से वे खेल रहे हैं, वही उनकी जल-समाधि लिख देगा।
कुदरती लहरों और जिम्मेदारों की लापरवाही ने 13 जिंदगियाँ लील ली है इस दर्दनाक हादसे के चश्मदीदों और अपनों की जानें गंवाने वालों ने नवभारत को रुंधे गले से खौफनाक सच बताया। क्रूज हादसे में अपने परिवार के सदस्यों को खोने वाले दिल्ली निवासी विनोद कुमार ने बताया कि वहां किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्थाएं नहीं थी। अगर लाइफ जैकेट मिली होती और रेस्क्यू के दौरान रोशनी व अन्य व्यवस्था होती तो आज वह अपने परिवार को नहीं खोते। उन्होंने लापरवाहियों का कच्चा चि_ा खोलते हुए गंभीर आरोप रेस्क्यू टीम पर लगाया।
उनका कहना है कि हादसा होने के तुरंत बाद कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। बचाव दल ने घटना के दूसरे दिन सुबह क्रेन के जरिए क्रूज को निकाला और सर्चिंंग की थी वे घटना की रात को ही होना था। जैसा रेस्क्यू दूसरे दिन चला वैसा दर्दनाक घटना की रात को ही चल जाता तो कई जानें बच जाती। जिंदा लाशों के बीच पूरी रात बीती है, सांसे फंसी रही, न सुरक्षा कवच मिला और न ही रोशनी। पूरी रात लोग क्रूज के अंदर फंसे रहे और दम तोड़ते रहे। रात के समय न तो पर्याप्त रोशनी (लाइट) की व्यवस्था थी और न ही गोताखोर पानी के नीचे जाने को तैयार थे। सुबह तक सब बर्बाद हो गया था। क्रेन से सुबह क्रूज को निकाला गया अगर वहीं रात में हो जाता और रेस्क्यू दल रोशनी के साथ पानी में उतरता, तो कई लोगों को जिंदा निकाला जा सकता था। लापरवाही जिंदगियों पर भारी पड़ गईं।
सुरक्षा मानकों की उड़ी धज्जियां, जीजा ने शीशे तोड़े लाइफ जैकेट बांटी
विनोद ने बताया कि क्रूज पर सुरक्षा का कोई नामोनिशान नहीं था। क्रूज में प्रवेश के समय किसी भी यात्री को लाइफ जैकेट नहीं पहनाई गई। जब क्रूज डूबने की स्थिति में पहुंचा, जहाज डूबने लगा और मौत सामने दिखने लगी, तब उनके जीजा ने साहस का परिचय दिया। जीजा ने खुद हिम्मत दिखाकर क्रूज के शीशे तोड़े और अंदर रखी लाइफ जैकेट निकालकर लोगों में बांटी। हादसे में उनके परिवार की मुधर मैसी, त्रिशान, मरीन मैसी का निधन हो गया जबकि जुलियस मैसी, सिया, प्रदीप सुरक्षित बच सके।
लापरवाही की बंद कोठरी बना क्रूज
क्रूज को लापरवाही की बंद कोठरी बना दिया गया था । विनोद के अनुसार हादसे के वक्त जब लहरें तेज हुईं और क्रूज डगमगाने लगा, तो प्रबंधन ने यात्रियों को ऊपर से हटाकर नीचे के केबिन में भेज दिया। नीचे का हिस्सा चारों तरफ से शीशों से बंद था। यह सबसे बड़ी गलती थी। अगर उनका परिवार ऊपर रहता और लाइफ जैकेट पहनी होती, तो क्रूज पलटने के बाद भी लोग तैरकर जान बचा सकते थे।
अनुभवहीन पायलट, मौसम की अनदेखी जानों पर पड़ी भारी
विनोद के अनुसार क्रूज का पायलट पूरी तरह अनुभवहीन लग रहा था। खराब मौसम की जानकारी होने के बावजूद वह क्रूज को बीच लहरों में ले गया। उसने न तो सुरक्षा गाइडलाइंस का पालन किया और न ही स्थिति की गंभीरता को समझा। उनके परिवार के छह लोग इस यात्रा पर थे। जिनमें से तीन को उन्होंने खो दिया। उन्होंने रुंधे गले से बताया कि रेस्क्यू में हुई देरी के कारण वे अपने प्रियजनों को नहीं बचा पाए। हादसे के अगले दिन शवों को पानी के नीचे से निकाला गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यदि रात में ही रेस्क्यू दल मुस्तैदी दिखाता तो मंजर कुछ और होता और मेरा परिवार आज मेरे साथ होता।
ममता की कुर्बानी: बच्चों को बचाने वाली माँ खुद लहरों में समा गई
चश्मदीद मनोज ने कहा, सब कुछ 2 से 5 मिनट में खत्म हो गया
फूटाताल बढ़ई मोहल्ला निवासी मनोज सेन के परिवार के लिए बच्चों की कामयाबी का जश्न जिंदगी भर के गहरे जख्म में तब्दील हो गया। क्रूज हादसे ने हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है।
नवभारत से चर्चा के दौरान मनोज ने बताया कि क्रूज पर वे पत्नी ज्योति सेन, तीन बच्चों अंशिका, तनिष्क, तनिष्का के साथ सवार थे। मनोज ने रुंधे गले से बताया, सब कुछ 2 से 5 मिनट के भीतर खत्म हो गया। जैसे ही क्रूूज पलटने लगा, ज्योति ने अपनी जान की परवाह किए बिना तीनों बच्चों को सुरक्षित दिशा में धकेल दिया। बच्चों को बचाने के चक्कर में वह खुद क्रूूज के निचले हिस्से की तरफ दब गईं और हमेशा के लिए शांत हो गईं। इस हादसे में मनोज के सीने और हाथ में चोट आई है, जबकि उनकी एक बेटी और छोटे बेटे के हाथ-पैर में गंभीर फैक्चर हुआ है।
खुशियाँ मनाने गए थे, मिला उम्र भर का गम
मनोज ने बताया कि उनके दो बच्चों ने हाल ही में 10वीं कक्षा पास की थी। बच्चों की इस सफलता और उनके 11वीं में प्रवेश की खुशी को सेलिब्रेट करने के लिए पूरा परिवार क्रूज पर सैर करने निकला था। लेकिन संचालक की लापरवाही ने इस खुशी को मातम में बदल दिया।
मिन्नतें की पर पायलट नहीं माना, लाइफ जैकेट नहीं थी, चेतावनी को किया अनसुना-
हादसे में जीवित बचे मनोज सेन ने क्रूज प्रबंधन और क्रूज ड्राइवर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटकों को कोई लाइफ जैकेट नहीं दिया गया था, जो कि सुरक्षा के लिहाज से अनिवार्य है। जब आंधी-तूफान शुरू हुआ, तब पर्यटकों ने ड्राइवर से क्रूज को किनारे लगाने की मिन्नतें कीं, लेकिन ड्राइवर ने जिद में क्रूज को बीच पानी में ही घुमा दिया, जिससे वह पलट गया।
खराब मौसम का अलर्ट तो क्यों चलाया क्रूज
मनोज के अनुसार, जब क्रूज डूबने लगा तो ड्राइवर ने कोई अनाउंसमेंट नहीं किया। हादसा लापरवाही की भेंट चढ़ा है। मौसम विभाग से पहले ही पता चल जाता है कि मौसम कब कैसा रहेगा खराब मौसम होने के बावजूद भी क्रूच को चलाया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब मौसम विभाग ने पहले ही खराब मौसम का अलर्ट जारी किया था, तो क्रूज को चलाने की अनुमति क्यों दी गई? क्या पर्यटकों की जान की कीमत चंद रुपयों से भी कम है? बिना मेंटेनेंस और बिना सुरक्षा उपकरणों के क्रूज का संचालन किया गया।
चश्मदीद मोहित ने कहा आंखों से देखा खौफनाक मंजर, पहाड़ से कूद 6 को बचाया-
नवभारत से दर्दनाक हादसे के चश्मदीद मोहित नामदेव निवासी धनवंतरी नगर ने बताया कि उन्होंने अपनी आंखों से खौफनाक मंजर देखा बल्कि अपनी जान जोखिम में डालकर चट्टानों के बीच फंसे 6 लोगों की जान बचाई।मोहित नामदेव के अनुसार वह बरगी घूमने गए थे और टिकट लेकर क्रूज के वापस आने का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच खमरिया टापू के पास तेज आंधी के कारण क्रूज अनियंत्रित होकर डूबने लगा। आंधी इतनी भीषण थी कि आधा क्रूज डूब चुका था। लोग फंसे थे। मुझे तैरना आता था मैंने अपनी जान की परवाह किए बिना पहाड़ से छलांग लगाई और चट्टानों तक पहुंचकर डूबते हुए 6 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
सूची में हुआ रेस्क्यू, युवक का दावा मैं कू्रज में ही नहीं था सवार-
प्रशासनिक रिपोर्ट में जिनका रेस्क्यू किया गया उसमें धनवंतरी नगर निवासी मोहित नामदेव का नाम भी शामिल है। मोहित ने नवभारत से चर्चा के दौरान चौंकाने वाला दावा किया जिसने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। मोहित ने दावा कि वह क्रूज पर सवार नहीं था। मोहित का नाम उन लोगों की सूची में डाल दिया गया जिनकी जान बचाई गई थी। मोहित ने कहा, यह गलत जानकारी फैली है कि मैं क्रूज में सवार था और मेरी जान बचाई गई। सच यह है कि मैं बाहर था और मैंने खुद लोगों को मौत के मुंह से बाहर निकाला है।
4 दिन सिसकियों, 13 लाशों का गवाह बना बरगी तट-
बरगी बांध में गुरुवार की वो शाम, जो हंसी-ठिठोली और कुदरत के नजारों के साथ शुरू हुई थी, चंद मिनटों में मौत के चीत्कार में तब्दील हो गई थी। शाम के 5:50 बजे क्रूज पर हंसी-मजाक का माहौल था। क्रूज पर सवार पर्यटक लहरों का आनंद ले रहे थे, कोई सेल्फी ले रहा था तो कोई ठंडी हवाओं में मुस्कुरा रहा था। तभी अचानक आसमान का मिजाज बदला। फिजाएं बदलीं और एक भयानक तूफान काल बनकर आया। आंधी ने क्रूज को झकझोरा, निचले हिस्से में पानी घुसने लगा और देखते ही देखते क्रूज एक तरफ झुक गया। ठीक 6 बजे, जब तक कोई कुछ समझ पाता, क्रूज एक तरफ झुका और देखते ही देखते गहरे पानी में समा गया। 10 मिनट के भीतर सब कुछ खत्म हो गया। लहरों के बीच पर्यटकों की चीखें पानी की गहराई में दफन हो गईं।
बरगी का तट पर चार दिनों तक सिसकियों और 13 का गवाह बना रहा। हर डूबता सूरज एक नई लाश और एक नई बर्बादी की खबर लेकर आया। पहले और दूसरे दिन उम्मीदें टूटती रहीं और 9 शव निकाले गए। तीसरे और चौथे दिन की तलाश ने रही-सही कसर पूरी कर दी और कुल 13 शव मिले । रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जैसे-जैसे पानी से शव बाहर आए, वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप गई। इस हादसे में 28 लोग खुशनसीब थे और मौत के जबड़े से निकल आए थे। यह हादसा सिर्फ कुदरत का कहर नहीं, बल्कि बड़ी लापरवाही का नतीजा भी माना जा रहा है।
