नई दिल्ली | भारत के रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 2025 की ऑडिट रिपोर्ट ने एक गंभीर स्थिति पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के पास मौजूद आपातकालीन कच्चा तेल भंडार वर्तमान खपत के हिसाब से केवल पांच दिनों की मांग पूरी करने में सक्षम है। भारत की कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) की भंडारण क्षमता का लगभग 64% हिस्सा ही अभी भरा हुआ है। हालांकि, पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने स्पष्ट किया है कि यदि तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के पास मौजूद स्टॉक को भी जोड़ लिया जाए, तो देश के पास कुल 74 दिनों की जरूरतों के बराबर तेल उपलब्ध है, जो किसी भी आकस्मिक संकट से निपटने के लिए एक सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता के रूप में भारत अपनी जरूरतों का 88% हिस्सा आयात करता है, जिसमें इराक, सऊदी अरब और यूएई जैसे मध्य-पूर्व के देशों की बड़ी हिस्सेदारी है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) सदस्य देशों को कम से कम 90 दिनों के शुद्ध आयात के बराबर भंडार रखने की सिफारिश करती है। इसकी तुलना में चीन के पास 120 दिन और जापान के पास लगभग 200 दिनों का स्टॉक है। विशेषज्ञों का मानना है कि रणनीतिक भंडार न केवल युद्ध जैसी स्थितियों में काम आते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के अचानक उछाल के समय भी अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करते हैं। कैग ने अपनी रिपोर्ट में भंडारण क्षमता बढ़ाने की धीमी रफ्तार पर भी सवाल उठाए हैं।
राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को आश्वस्त किया है कि कच्चे तेल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सरकार ने आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आयात के स्रोतों को विविध बनाया है। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, केवल भंडारण बढ़ाना ही समाधान नहीं है, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) की ओर तेजी से बढ़ना अनिवार्य है ताकि कच्चे तेल पर निर्भरता कम की जा सके। फिलहाल, विशाखापत्तनम, मंगलौर और पदुर स्थित तीन केंद्रों का संचालन ‘इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड’ (ISPRL) द्वारा किया जा रहा है। सरकार अब दूसरे चरण के तहत भंडारण क्षमता को और अधिक विस्तार देने की योजना पर काम कर रही है ताकि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।

