नई दिल्ली | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी द्वारा ‘अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग’ (AFR) प्रोजेक्ट में किए गए 950 करोड़ रुपये के निवेश की जमकर सराहना की है। ट्रंप का मानना है कि यह निवेश अमेरिका में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
घाटे का सौदा होने की आशंका
ट्रंप के दावों के उलट, खोजी पत्रकारिता संस्थान ‘प्रोपब्लिका’ की एक हालिया रिपोर्ट ने इस प्रोजेक्ट पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि AFR एक संघर्षरत स्टार्टअप है और इसके प्रमुख जॉन कैलसे का पिछला रिकॉर्ड विवादों से भरा रहा है। इस रिपोर्ट ने निवेशकों के बीच चिंता पैदा कर दी है कि क्या यह परियोजना कभी शुरू भी हो पाएगी या यह मुकेश अंबानी के लिए एक बड़ा वित्तीय घाटा साबित होगी।
AFR प्रोजेक्ट की सच्चाई
वर्तमान में अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, लेकिन AFR प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता को लेकर लगातार संदेह जताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनी की पिछली विफलताएं और नेतृत्व की संदिग्ध पृष्ठभूमि इस निवेश की सफलता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। फिलहाल, रिलायंस का यह निवेश बड़े आर्थिक और राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन गया है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

