(मुकेश कौशिक) खुरई। शासकीय अस्पताल में समय पर ओपीडी नहीं खुल रही है, अस्पताल के गलियारों में गंदगी का ढेर देखा जा सकता है, मरीजों के पलंगों से चादर नदारत रहते हैं। जबकि लेब,नीचे से ऊपर करने से मरीजों को परेशानी हो रही है।
अस्पताल में अनेक वर्षों से लेब नीचे संचालित होती आ रही थी जहां सहुलियत से सभी तरह की जांचें कराने वाले लेब कक्ष तक पहुंच जाते थे लेकिन अब ऊपर बिल्डिंग में सबसे पीछे तरफ लेब शिफ्ट कर दी है जिस वजह से उम्र दराज महिला पुरुष मरीजों को जीना के रास्ते लेब तक पहुंचना पड़ता है जो उनके लिए कष्ट दायक हो रहा है, दूसरी बात यह है कि सबसे पीछे तरफ लेब स्थापित करने का क्या औचित्य है, जब नीचे अनेकों कक्ष है जहां सुविधा से लेब संचालित की जा सकती है। वर्तमान में मरीजों को हो रही असुविधा को दृष्टिगत रखते हुए अस्पताल प्रबंधन को लेब कक्ष नीचे स्थापित करना चाहिए। अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं। अस्पताल में मरीजों को सहजता रहेगी तो वह बिना तकलीफ के अपनी सभी जांचें कराने के लिए लेब कक्ष तक पहुंच सकेगे, बिगढैल अव्यवस्था में सुधार की आवश्यकता सभी मरीज चाहते हैं।
तीन माह से नहीं मिला 15 सफाई कर्मचारीयो का वेतन, अस्पताल और उसके परिसर को सफाई कर्मी ही स्वच्छ रखने का कार्य करते हैं, यह उनकी सम्पूर्ण जवाबदारी भी रहती है,अस्पताल में 15 सफाई कर्मी आउटसोर्स के माध्यम से कार्य करते हैं मगर उन्हें 3 माह से वेतन नहीं मिला है और जून माह पूर्ण होते ही 4 माह का बकाया हो जाएंगा, वेतन न मिलने के बाद भी 15 सफाई कर्मी नियमित अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं मगर किसकी लापरवाही से गलियारे में गंदगी देखने को मिल रही है। अगर व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए अस्पताल में डाक्टरों की ड्यूटी में परिवर्तन किया गया है तो फिर यह अव्यवस्थाएं सामने क्यों आ रही है।
