जबलपुर: जिला उपभोक्ता आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को सेवा में कमी का दोषी पाया। इसी के साथ 30 दिन के भीतर दावे का निराकरण करने के निर्देश दे दिए। यही नहीं मानसिक पीड़ा के एवज में पांच हजार व मुकदमे का खर्च दो हजार भी भुगतान करने कहा।परिवादी जबलपुर निवासी रुचिरा गुप्ता व शुभम केशरवानी की ओर से अधिवक्ता राजेन्द्र गुप्ता ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि परिवादियों ने मेडसेव हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी की कैशलेश मेडिकल पॉलिसी ली थी]
उक्त बीमा कंपनी का अनुबंध नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से था और उक्त बीमा कंपनियों से जबलपुर स्थित निजी अस्पताल अनुबंधित था। रुचिरा 19 अप्रैल 2024 को बीमार हुई। जिस पर उसके पति शुभम ने निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां गंभीर स्थिति को देखते हुए आकस्मिक विभाग में भर्ती कर ईलाज शुरु किया गया। स्थिति में सुधार होने पर जनरल वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया और वहां उनका इलाज हुआ। इलाज के बाद अस्पताल द्वारा उन्हें अवगत कराया गया कि उनके भुगतान बीमा कंपनियों द्वारा नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में जब पीडि़त पक्ष ने बीमा कंपनियों से संपर्क किया तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसलिए रुचिरा गुप्ता को 20 घंटा अतिरिक्त अस्पताल में रुकना पड़ा और उनके पति ने उधार लेकर अस्पताल का बिल अदा किया।
