
नामली। सडक़ हादसे में घायल मुकेश गुजरिया की इंदौर में इलाज के दौरान मौत के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया। आक्रोशित नागरिकों ने मुआवजा और अन्य मांगों को लेकर पलदूना रोड पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो करीब 18 घंटे तक चला और पूरा क्षेत्र छावनी में तब्दील हो गया।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में मृतक परिवार को उचित मुआवजा, सैलाना रोड से गोकुल चौराहा तक फोरलेन पर स्ट्रीट लाइट लगाना और नए स्पीड ब्रेकर बनाना शामिल था। मांगें पूरी नहीं होने पर नागरिकों ने अंतिम संस्कार हाईवे पर ही करने की चेतावनी दे दी थी। प्रशासन की ओर से एसडीएम विवेक सोनकर, आशीष उपाध्याय, एसडीओपी किशोर पाटनवाला और जावरा थाना प्रभारी विक्रम चौहान सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन परिजन और ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। कई लोग रातभर धरना स्थल पर डटे रहे। अगले दिन सुबह बड़ी संख्या में लोग फिर एकत्रित हुए और नारेबाजी के बीच मांगें पूरी करने का दबाव बनाया। सुबह करीब 10:30 बजे खेड़ापति हनुमान मंदिर रोड से शव यात्रा निकाली गई, जिसे नए बस स्टैंड पर रोककर अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया गया। स्थिति को गंभीर होते देख एमपीआरडीसी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और कंपनी से समन्वय कर मुआवजा दिलाने तथा अन्य मांगों को 12 दिनों में पूरा करने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ और शव यात्रा पुन: निकाली गई।
शव यात्रा नीम चौक, होली चौक और सब्जी मंडी से होते हुए मुक्तिधाम पहुंची, जहां मुकेश का अंतिम संस्कार किया गया।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय में मांगें पूरी नहीं हुईं तो फिर से उग्र आंदोलन किया जाएगा। साथ ही मृतक के परिवार के लिए नौकरी की मांग भी उठाई गई। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में नागरिक और कुमावत समाज के लोग मौजूद रहे।
