
उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा है कि इस बार का सिंहस्थ क्षिप्रा नदी के जल से ही हो, ऐसे में बारिश का पानी संग्रहित करके कुंभ के दौरान नदी में छोड़ा जाएगा जिससे श्रद्धालु शुद्ध पवित्र जल से स्नान कर सकेंगे, हरियाखेड़ी सिलारखेड़ी ,सेवरखेड़ी यह तीनों खेड़ी मिलकर जल संकट की बेड़ी तोड़ेगी।
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत जल परियोजनाओं को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में है। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने शनिवार को हरियाखेड़ी जल आवर्धन परियोजना और सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी जल परियोजना का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान संभागायुक्त आशीष सिंह, डीआईजी नवनीत भसीन, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजौरा ने हरियाखेड़ी परियोजना स्थल पर कार्य की धीमी गति पर नाराजग़ी जताते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य को तेजी से पूरा किया जाए।
जांच के सख्त निर्देश-सालभर पानी उपलब्ध-जल प्रबंधन पर फोकस
डॉ. राजौरा ने स्पष्ट कहा कि कार्यों की नियमित गुणवत्ता जांच की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ सभी कार्य पूरे किए जाएं। जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री शुभम अग्रवाल ने बताया कि सेवरखेड़ी जलाशय में वर्तमान में अर्थवर्क और पिचिंग का कार्य जारी है। बारिश के मौसम में शिप्रा नदी से पंपिंग के जरिए पानी लाया जाएगा, जबकि गर्मी के मौसम में ग्रैविटी फ्लो के माध्यम से जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। गौरतलब है कि सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित उपस्थिति को देखते हुए जल प्रबंधन सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन जल परियोजनाओं की मॉनिटरिंग लगातार तेज कर रहा है।
सेवरखेड़ी जलाशय 75 प्रतिशत काम पूरा
इसके बाद उन्होंने सेवरखेड़ी जलाशय का निरीक्षण किया, जो सिंहस्थ 2028 के लिए बेहद महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना का लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। निरीक्षण के दौरान अर्थवर्क (मिट्टी भराई) और पिचिंग कार्यों का बारीकी से परीक्षण किया गया। डॉ. राजौरा ने मिट्टी की गुणवत्ता जांच और क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम की विस्तृत जानकारी ली।
