
इंदौर। आज हर व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहता है। इसके लिए धन अर्जन से लेकर अनेकों सुख के साधन अपनाता है, लेकिन ज्यादा से ज्यादा धन उपार्जन के बाद भी जीवन में सुख सुविधाएं तो बढ़ गई परंतु जीवन का सुकून आनंद कहीं खो गया ,पैसा है,पर चरित्र नहीं हैं । मान शान स्टेटस के लिए वह जीवन मूल्यों को ही खोने लगा है। अतः इस सांसारिक भागदौड़ से कुछ समय रुककर अपने से पूछे कि मेरे जीवन का लक्ष्य क्या है? मुझे कैसा जीवन बनाना है ? अपनी जांच करने पर पाएंगे कि मेरे स्वयं के अंदर व्यक्तिगत रूप से, पारिवारिक रूप से कई गलत आदतें हैं जिसे
बदलना आवश्यक है।
उक्त विचार न्यू पलासिया स्थित ज्ञान शिखर में चल रहे ज्ञान मंथन व्याख्यान माला के अंतर्गत ब्रह्माकुमारी आकांक्षा बहन ने अपनी आदतों पर नियंत्रण विषय पर व्यक्त किए ।
आगे आपने बहुत विस्तार पूर्वक समझाया कि हमारे अंदर आदतें कैसे बनती हैं। हमने बुरी आदतें बनाकर जीवन को बिगाड़ा है, अब सही आदतों से जीवन को संवारना है।
