बीजिंग/वॉशिंगटन, 01 मई (वार्ता) चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने शुक्रवार को परीक्षण, प्रमाणन और दूरसंचार के क्षेत्रों में अमेरिका की ओर से लगाए गए नए प्रतिबंधात्मक उपायों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। चीन का कहना है कि ये कदम दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों की स्थिरता को गंभीर रूप से कमजोर करते हैं। चीन ने अमेरिका की उन कार्रवाइयों का कड़ा विरोध किया है, जिनके तहत चीन की सभी प्रयोगशालाओं (लैब्स) को स्मार्टफोन, कैमरा और कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के परीक्षण से रोक दिया गया है। ये वे उपकरण हैं जिनका उपयोग अमेरिका में किया जाना है।
अमेरिकी संघीय संचार आयोग (एफसीसी) के अनुसार, ‘सुरक्षित और विश्वसनीय संचार नेटवर्क अधिनियम’ की धारा 2 के तहत कुछ संचार उपकरणों और सेवाओं को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा या व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए अस्वीकार्य जोखिम माना गया है।
एफसीसी की इस सूची में हुवावे टेक्नोलॉजीज कंपनी और जेडटीई कॉर्पोरेशन जैसी कई विदेशी कंपनियों द्वारा निर्मित दूरसंचार और वीडियो निगरानी उपकरण शामिल हैं। इसके साथ ही उनके उपकरणों का उपयोग करके प्रदान की जाने वाली संबंधित सेवाओं को भी इसमें रखा गया है। इस दायरे में हाईटेरा, हांगझू हिकविज़न और डहुआ टेक्नोलॉजी कंपनी के वीडियो निगरानी और दूरसंचार उपकरण भी शामिल हैं। विशेष रूप से वहां, जहां ऐसी तकनीकों का उपयोग सार्वजनिक सुरक्षा, सरकारी सुविधाओं या महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में किया जाता है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि अप्रैल में अमेरिकी संघीय संचार आयोग ने उन देशों के परीक्षण और प्रमाणन निकायों की मान्यता रद्द करने का प्रस्ताव दिया था, जिन्होंने अमेरिका के साथ कोई विशेष समझौता नहीं किया है। मंत्रालय ने कहा कि इन उपायों के तहत प्रतिबंधित सूची में शामिल संस्थाओं को अमेरिका में दूरसंचार गतिविधियों के संचालन से भी रोक दिया जाएगा।
चीनी मंत्रालय के बयान में कहा गया, “ये प्रतिबंधात्मक उपाय चीन-अमेरिका व्यापार और आर्थिक संबंधों में बड़ी मुश्किल से हासिल की गई स्थिरता को खतरे में डालते हैं। चीन इस मामले पर गहरी चिंता व्यक्त करता है और ऐसी कार्रवाइयों का पुरजोर विरोध करता है।” चीन ने कहा कि अमेरिकी आयोग ने तकनीकी तटस्थता के सिद्धांत को छोड़ दिया है और ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ की अवधारणा की अनुचित रूप से व्यापक व्याख्या की है। मंत्रालय के अनुसार, यदि ये उपाय अंततः लागू किए जाते हैं, तो इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक व्यवस्था में गंभीर व्यवधान उत्पन्न होगा। इससे दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और संबंधित क्षेत्रों में वैश्विक उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाएं अस्थिर हो जाएंगी।
बयान में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि अमेरिका दूसरों के विचारों की अनदेखी कर कार्रवाई करना जारी रखता है, तो चीन अपनी कंपनियों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए दृढ़ता से सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
संघीय संचार आयोग ने स्पष्ट किया है कि उसकी सूची में एओ कैस्परस्की लैब और कैस्परस्की लैब इंक जैसी संस्थाओं द्वारा प्रदान किए गए साइबर सुरक्षा और सूचना सुरक्षा उत्पाद भी शामिल हैं। इसमें एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर और एकीकृत सुरक्षा समाधान भी आते हैं। सूची में चाइना मोबाइल इंटरनेशनल यूएसए, चाइना टेलीकॉम (अमेरिका), पैसिफिक नेटवर्क्स कॉर्प, उसकी सहायक कंपनी कॉमनेट (यूएसए) और चाइना यूनिकॉम (अमेरिका) जैसे अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार सेवा प्रदाता भी शामिल हैं, जिनकी सेवाएं संचार अधिनियम की धारा 214 के तहत विनियमित हैं। इसके अतिरिक्त, इस सूची में मानवरहित विमान प्रणाली (यूएएस), जिन्हें आमतौर पर ड्रोन के रूप में जाना जाता है, और उनके महत्वपूर्ण घटकों को भी शामिल किया गया है, यदि वे विदेशों में निर्मित किए गए हों।
इसमें विदेशों में निर्मित राउटर भी शामिल हैं, जब तक कि उन्हें अमेरिकी अधिकारियों से सशर्त मंजूरी नहीं मिल जाती। कुल मिलाकर, यह सूची उन विदेशी संचार और साइबर सुरक्षा तकनीकों को प्रतिबंधित करने के लिए बनाई गई है जो सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। इन उपायों का मुख्य उद्देश्य चीनी प्रयोगशालाओं को अमेरिकी बाजार के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के परीक्षण से रोकना है। वर्तमान में, अमेरिका के लगभग 75 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का परीक्षण चीन में किया जाता है।
एक अलग घटनाक्रम में, आयोग ने चीनी दूरसंचार ऑपरेटरों को अमेरिका में डेटा सेंटर चलाने से रोकने और उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा की ‘कवर्ड लिस्ट’ में शामिल कंपनियों के साथ जुड़ने से प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव को भी आगे बढ़ाया है।

