मुंबई | भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF) के लिए ‘फास्ट-ट्रैक’ नियम लागू कर दिए हैं। नए नियमों के तहत, अब बड़े मूल्य वाले फंडों (LVF) को छोड़कर अन्य एआईएफ आवेदन दाखिल करने के मात्र 30 दिनों के भीतर अपनी योजना शुरू कर सकेंगे। यदि इस अवधि के दौरान सेबी कोई आपत्ति नहीं जताता है, तो फंड मैनेजर निवेशकों को प्राइवेट प्लेसमेंट मेमोरेंडम (PPM) जारी कर सकते हैं। पहले सेबी पीपीएम की सघन जांच करता था, जिससे फंड लॉन्च होने में काफी देरी होती थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और त्वरित बना दी गई है।
इस नई व्यवस्था के तहत अब पीपीएम में दी गई जानकारी की सत्यता और पूर्णता की पूरी जिम्मेदारी मर्चेंट बैंकर और एआईएफ मैनेजर की होगी। आवेदन के समय ड्यू डिलिजेंस सर्टिफिकेट और फिट एंड प्रॉपर डिक्लेरेशन जैसे दस्तावेज जमा करना अनिवार्य है। सेबी ने स्पष्ट किया है कि पीपीएम में यह घोषणा अनिवार्य होगी कि नियामक इन जानकारियों की गारंटी नहीं लेता है। साथ ही, एआईएफ को अपनी योजना शुरू करने के 12 महीने के भीतर पहली फंडिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जिससे बाजार में पूंजी प्रवाह और अधिक अनुशासित होगा।
बाजार नियामक ने कहा कि यह बदलाव ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने और निवेशकों की बढ़ती परिपक्वता को देखते हुए किया गया है। यह नया नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और लंबित आवेदनों पर भी इसका लाभ मिलेगा। हालांकि, सेबी ने चेतावनी दी है कि यदि जमा की गई जानकारी में कोई भी विसंगति या धोखाधड़ी पाई जाती है, तो संबंधित संस्थाओं के खिलाफ सख्त नियामक कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से स्टार्टअप इकोसिस्टम और निजी इक्विटी क्षेत्र में निवेश की गति काफी बढ़ जाएगी।

