वैश्विक तेल राजनीति में बड़ा उलटफेर: यूएई ने ओपेक संगठन से तोड़ा 60 साल पुराना नाता, तेल उत्पादन की पाबंदियां हटने से भारत समेत दुनिया को मिल सकता है सस्ता पेट्रोल-डीजल

दुबई/नई दिल्ली | संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पेट्रोलियम निर्यातक देशों के शक्तिशाली संगठन ‘ओपेक’ (OPEC) को अलविदा कहकर वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। 1 मई, 2026 से प्रभावी हुए इस फैसले के बाद अब यूएई तेल उत्पादन के लिए ओपेक के कड़े कोटा सिस्टम से आजाद हो गया है। यूएई के ऊर्जा मंत्री सुहैल अल मजरूई ने स्पष्ट किया कि संगठन से अलग होने के बाद देश को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और बाजार की मांग के अनुसार आपूर्ति करने में अधिक लचीलापन मिलेगा। ईरान युद्ध के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था पर आए संकट के बीच यूएई का यह कदम उसकी दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

ओपेक छोड़ने के बाद यूएई अब अपनी क्षमता के अनुसार प्रतिदिन 4.5 मिलियन बैरल से अधिक तेल उत्पादन कर सकेगा, जो ओपेक द्वारा निर्धारित 3.4 मिलियन बैरल के कोटे से काफी ज्यादा है। जानकारों का मानना है कि जब वैश्विक बाजार में यूएई की अतिरिक्त सप्लाई पहुंचेगी, तो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बनेगा और वैश्विक बेंचमार्क ‘ब्रेंट क्रूड’ की दरों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और शिपिंग रास्तों में आ रही रुकावटों के कारण उत्पादन बढ़ाने का पूर्ण लाभ मिलने में 12 से 18 महीने का समय लग सकता है, लेकिन यह फैसला ओपेक के एकाधिकार को बड़ी चुनौती देगा।

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यूएई का यह फैसला बेहद राहत भरा साबित हो सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा यूएई से आयात करता है। ओपेक की पाबंदियों से मुक्त होकर यदि यूएई अधिक उत्पादन और निर्यात करता है, तो भारत को न केवल पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति सुनिश्चित होगी, बल्कि प्रतिस्पर्धी कीमतों के चलते घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम होने की संभावना भी बढ़ जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी यूएई के इस कदम से खुश हैं, क्योंकि इससे ओपेक का तेल कीमतों को नियंत्रित करने का प्रभुत्व कमजोर होगा और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

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