ऊर्जाधानी में पांच दिनों से सूर्य देवता के दर्शन नहीं, पछुआ हवा ने बढ़ाई ठिठुरन

सिंगरौली। ऊर्जाधानी में कड़ाके की ठंड ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। बीते पांच दिनों से सूर्य देवता के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं, जिससे ठंड का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। सुबह से शाम तक छाए घने कोहरे और पछुआ हवा ने ठिठुरन को कई गुना बढ़ा दिया है। हालात यह हैं कि लोग घरों से निकलने से पहले कई बार सोचने को मजबूर हैं।

शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक हाड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ रही है। तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे आमजन के साथ-साथ गरीब, मजदूर, बुजुर्ग और मवेशी सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। खुले में रहने वाले लोगों के लिए यह ठंड किसी आफत से कम नहीं है। वहीं कड़ाके की ठंड स्कूली नौनिहाल बच्चों के लिए भी बड़ी समस्या बन गई है। सुबह-सुबह ठंड और कोहरे में स्कूल जाने को मजबूर बच्चे ठिठुरते नजर आ रहे हैं। कई अभिभावक बच्चों को सर्दी, खांसी और बुखार की आशंका के चलते स्कूल भेजने से हिचक रहे हैं। अभिभावकों की मांग है कि ठंड को देखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव किया जाए या कुछ दिनों के लिए अवकाश घोषित किया जाए, ताकि बच्चों की सेहत से कोई समझौता न हो। साथ ही भीषण ठंड के बावजूद प्रशासनिक तैयारियां नाकाफी नजर आ रही हैं। अलाव, कंबल वितरण और राहत व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है। आमजन का सवाल है कि जब मौसम विभाग पहले ही ठंड और कोहरे की चेतावनी दे चुका था, तो समय रहते ठोस इंतजाम क्यों नहीं किए गए। ऊर्जाधानी में ठंड का यह प्रकोप फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा। जब तक सूर्य देवता के दर्शन नहीं होते, तब तक राहत की उम्मीद भी कम ही है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस ठंड से निपटने के लिए जमीन पर ठोस कदम उठाएगा या फिर जनता को इसी तरह ठिठुरते रहने के लिए छोड़ दिया जाएगा।

कोहरे का कहर, सुबह 10 बजे तक थमी रहती है रफ्तार

घने कोहरे के चलते सुबह करीब 10 बजे तक दृश्यता बेहद कम बनी रहती है। हालत यह है कि सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आते हैं। हाईवे हो या ग्रामीण मार्ग, हर जगह हादसों का खतरा बना हुआ है। दोपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ भारी वाहनों को भी आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कोहरे और ठंड के इस दोहरे प्रकोप ने दैनिक जीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। लोग जरूरी कामों के लिए ही घरों से निकल रहे हैं। बाजारों में सुबह के समय सन्नाटा पसरा रहता है, जो दोपहर के बाद कहीं जाकर टूटता है।

गरीबों और मवेशियों पर सबसे ज्यादा मार

भीषण ठंड का सबसे ज्यादा असर गरीब, असहाय और खुले में जीवन यापन करने वालों पर पड़ रहा है। शहर के कई हिस्सों और ग्रामीण इलाकों में अलाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से लोगों में आक्रोश है। ठंड से बचाव के साधन न होने के कारण कई लोग रातें जागकर काटने को मजबूर हैं। मवेशियों की हालत भी चिंताजनक बनी हुई है। ठंड और कोहरे के कारण पशुधन बीमार पड़ने लगा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की चिंता बढ़ गई है। पशुओं के लिए भी न तो पर्याप्त आश्रय की व्यवस्था है और न ही ठंड से बचाव के उपाय।

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