
बैतूल।आदिवासी बहुल ग्रामीण क्षेत्रों में कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे के लगातार दौरों से प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से मुख्यालयों से अनुपस्थित रहने वाले पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और अन्य मैदानी कर्मचारी अब गांवों में सक्रिय दिखाई देने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार कलेक्टर ने गत दिवस चिरापाटला का दौरा कर स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल व्यवस्था और पंचायत कार्यों की जमीनी समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ग्रामीणों को इलाज और बुनियादी सुविधाओं के लिए भटकना नहीं पड़ना चाहिए।
कलेक्टर ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिरापाटला में आयोजित स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने बीपी, शुगर, हीमोग्लोबिन और गर्भवती महिलाओं की जांच से संबंधित रजिस्टरों का अवलोकन किया तथा नेत्र एवं अस्थि रोग जांच व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रसूति सेवाएं नियमित रूप से संचालित हों और चिकित्सक एवं स्टाफ केंद्र पर उपस्थित रहें।
निरीक्षण के दौरान एंटीवेनम, आयरन सिरप और अन्य आवश्यक दवाओं की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को दूसरे अस्पतालों के चक्कर लगाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सभी मैदानी स्वास्थ्य संस्थाओं के प्रभावी संचालन के निर्देश दिए।
ग्राम अजई के रमेश कन्हैया ने दिव्यांगता प्रमाण पत्र नहीं बनने की समस्या बताई। इस पर कलेक्टर ने मेडिकल बोर्ड के माध्यम से शीघ्र प्रमाण पत्र जारी करने तथा जिले के प्रत्येक विकासखंड में महीने में एक बार मेडिकल बोर्ड आयोजित करने के निर्देश दिए।
ग्राम पंचायत चिरापाटला के सभाहॉल में आयोजित जनसंवाद में ग्रामीणों ने पेयजल, राशन कार्ड, फौती नामांतरण, प्रधानमंत्री आवास और राजस्व मामलों से संबंधित शिकायतें रखीं। कलेक्टर ने तीन दिनों के भीतर पेयजल समस्याओं के निराकरण के निर्देश दिए तथा निर्माणाधीन सड़क से क्षतिग्रस्त नल-जल योजना को तत्काल दुरुस्त करने को कहा।
बिना अनुमति हैंडपंप स्थल परिवर्तन पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए संबंधितों से वसूली के निर्देश दिए। वहीं बदनूरढाना की महिलाओं की मांग पर नए आंगनवाड़ी भवन की स्वीकृति तथा स्व-सहायता समूहों के लिए आजीविका भवन का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। ग्रामीणों का कहना है कि कलेक्टर के लगातार दौरों से स्वास्थ्य, पंचायत और राजस्व सेवाओं में लंबे समय से चली आ रही ढिलाई पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद जगी है।
