“मां माटी मानुष’ बनाम “झालमुरी,माछभात और नवका विहार” की राजनीति

दिल्ली डायरी प्रवेश कुमार मिश्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में आरोप प्रत्यारोप के सभी स्थापित सीमा लांघने के बाद टीएमसी और भाजपा के रणनीतिकारों ने अंत में स्थानीय मुद्दों के सहारे चुनावी बैतरणी पार पाने की तैयारी की है. टीएमसी ने जहां एक तरफ भाजपाई मुहिम को मां माटी मानुष के अपने भावनात्मक नारों के सहारे बंगाली अस्मिता को जगाने का प्रयास किया है वहीं दूसरी ओर भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा झालमुरी से लेकर नवका विहार के सहारे मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया गया और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं द्वारा स्थानीय भोजन माछभात का सेवन कर जनता के बीच सार्थक संदेश देने का प्रयास किया गया. हालांकि इन सबके बावजूद जहां पश्चिम बंगाल के प्रथम चरण में बढ़े मत प्रतिशत और मतदाताओं की चुप्पी सभी समीक्षकों को पशोपेश में डाल दिया है वहीं दिल्ली, गुजरात से लेकर अन्य राज्यों के सट्टाबाजारों की अनिश्चितता से सबकी धड़कने बढ़ गई हैं.

आप में बिखराव या आपरेशन लोटस का प्रभाव

कुछ दिन पहले तक भाजपा को पानी पी पी कर ख़री खोटी सुनाते हुए मीडिया की सुर्खियां बटोरने वाले तात्कालिक आप के युवा राज्यसभा सदस्य राघव चढ्ढा न सिर्फ अकेले बल्कि अपने साथ छह अन्य पार्टी सांसदों को लेकर जिस तरह से अचानक भाजपा में शामिल हुए उसकी चर्चा दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में खुब सुर्खियों में है. लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि चढ्ढा पहले सही बोल रहे थे या अब सही बोल रहे हैं. हालांकि उन्होंने कहा है कि उनके लोग कह रहे थे कि सही आदमी गलत जगह है इसलिए मैं सही जगह पर आ गया हूं. आम आदमी पार्टी के अंदर इस तरह के बिखराव को कुछ लोग आपरेशन लोटस की संज्ञा देते हुए भाजपाई रणनीतिकारों की खूब तारीफ कर रहे हैं जबकि कुछ लोग इसे आप के अंदर अरविंद केजरीवाल के निरंकुश दबाव के खिलाफ आवाज उठने की शुरुआत मान रहे हैं.

मोर्चाबंदी में जुटी भाजपा

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ डीएमके के खिलाफ कथित माहौल को भांपकर राजग खेमा

गदगद है. संभवतः इसी वजह से अभिनेता से राजनेता विजय, जिनकी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (टीवीके) जो इस चुनाव में पदार्पण किया है उसपर राजग रणनीतिकारों की नजर है. वोटर द्वारा बढ़-चढ़कर चुनाव में हिस्सा लेना सत्ता विरोधी लहर की आहट मानी जा रही है. चर्चा है कि भाजपाई रणनीतिकार डीएमके व कांग्रेस को छोड़ बाकी ज्यादातर क्षेत्रीय दलों के नेताओं से संपर्क साधे हुए हैं ताकि मौका मिले तो बगैर देरी किए सभी को एकजुट कर वैकल्पिक सरकार की रूपरेखा तैयार की जा सके.

चुनाव परिणाम पर टिका है इंडिया गठबंधन का भविष्य

लोकसभा चुनाव के पहले विपक्षी दलों को एकजुट रखने के लिए बनाया गया इंडिया गठबंधन का भविष्य पांच राज्यों के चुनाव परिणाम पर टिका हुआ है. दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तमिलनाडु व पश्चिम बंगाल में यदि डीएमके व टीएमसी सत्ता बचाने में कामयाब हो जाती है तो निश्चित रूप से विपक्षी एकता का यह समूह कुछ बदलाव के साथ पुनर्जीवित हो जाएगा. लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो कांग्रेस से अलग हो कर विपक्षी दल एक अलग मोर्चा तैयार कर लेंगे. कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी द्वारा कांग्रेस व भाजपा के विरोधी खेमे को एकजुट करने के लिए प्रयास आरंभ किया जा चुका है. इस प्रयास को टीएमसी,राजद व सपा जैसे कई दलों के वरिष्ठ नेताओं का प्रत्यक्ष समर्थन मिला हुआ है.

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