
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने पूर्व निर्देश के बावजूद मध्य प्रदेश कांग्रेस आइटी सेल के तीनों कार्यकर्ताओं को पेश न किए जाने के रवैये को आड़े हाथों लिया। इसी के साथ राजस्थान पुलिस को जमकर फटकार लगाई। साथ ही सख्त निर्देश दिया कि 29 अप्रैल को हर हाल में तीनों को कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए। न्यायालय ने पुलिस की ओर से दिए गए मिस कम्युनिकेशन के तर्क को दरकिनार कर दिया। इसके साथ ही राजस्थान पुलिस को आदेश का पालन करने दो दिन की मोहलत दी। साथ ही गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज व सीसीटीवी फुटेज भी प्रस्तुत करने निर्देश दिया है। मामला राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के नाम से वायरल फर्जी पत्र से संबंधित है। इसी सिलसिले में मप्र कांग्रेस आइटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था।
राजधानी भोपाल निवासी खिजर खान सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता एचएस छाबड़ा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि 20 अप्रैल 2026 की सुबह लगभग तीन बजे साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन भोपाल में पुलिस द्वारा कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं निखिल, बिलाल व इनाम को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था और उन्हें दो दिनों तक किसी भी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया है। राज्य शासन की ओर से दलील दी गई कि राजस्थान पुलिस की मौखिक सूचना पर तीनों को पुलिस थाने बुलाकर पूछताछ की गई और फिर उनके परिवार वालों को सौंप दिया गया। अगले दिन दोपहर को फिर साइबर सेल बुलाया और राजस्थान पुलिस को सौंप दिया गया। न्यायालय को बताया गया कि हिरासत या उनकी गिरफ्तारी का कोई रिकार्ड या उन्हें राजस्थान पुलिस को सौंपने से संबंधित कोई दस्तावेज उन्हें नहीं भेजा गया है। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पुलिस का पूरा बयान झूठा और मनगढ़ंत है। उन्होंने कहा कि आरोपियों को 20 अप्रैल 2026 की तडक़े हिरासत में लिया गया था और उन्हें किसी भी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया। यहां तक कि ट्रांसिट रिमांड के लिए भी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।
